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इंदौर में नलों से बह रहा ज़हर?”

“इंदौर में नलों से बह रहा ज़हर?” 36 मौतों के बाद भी नहीं चेती सरकार, 98% पानी के सैंपल फेल Indiaaajtak.in Editor-in-Chief : Vinod Vikat Date...


“इंदौर में नलों से बह रहा ज़हर?”

36 मौतों के बाद भी नहीं चेती सरकार, 98% पानी के सैंपल फेल

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Date : 29/05/2026


इंदौर / मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से एक बेहद भयावह और शर्मनाक सच सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री और इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

दूषित पानी पीने से 36 लोगों की मौत के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा इंदौर की 7 विधानसभा क्षेत्रों के 29 वार्डों से पीने के पानी के 240 सैंपल एकत्र कर उनकी जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लगभग 98% पानी के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए। यानी ट्रिपल इंजन सरकार के दावों के बीच इंदौर की जनता तक जो पानी पहुंच रहा है, वह पीने योग्य तक नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार पानी में ई. कोलाई, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया सहित कई खतरनाक तत्व निर्धारित मानकों से कहीं अधिक मात्रा में मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा पानी डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 36 लोगों की मौत हो चुकी है, तब भी इंदौर नगर निगम आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या जनता की जिंदगी की कोई कीमत नहीं बची?

भाजपा सरकार और नगर निगम पर आरोप लग रहे हैं कि वे विकास के बड़े-बड़े दावे तो कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में शहरवासियों को सरकारी नलों के माध्यम से “ज़हर” परोसा जा रहा है।

जनता पूछ रही है—

आखिर दूषित पानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

नगर निगम की जल परीक्षण व्यवस्था पूरी तरह फेल क्यों हो गई?

मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री इस मामले पर मौन क्यों हैं?

क्या 36 मौतों के बाद भी किसी की जवाबदेही तय होगी?

इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी मॉडल में यदि 98% पानी के सैंपल फेल हो रहे हैं, तो प्रदेश के बाकी शहरों की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार जनता के स्वास्थ्य के इस बड़े संकट पर कार्रवाई करती है या फिर हमेशा की तरह फाइलों में जांच दबाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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