शिवपुरी की प्यास पर राजनीति गर्म! “जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी, अब कलेक्ट्रेट में मैराथन बैठकों का दौर… आखिर इतने दिन कहां थे जनप्रतिनिधि?...
शिवपुरी की प्यास पर राजनीति गर्म!
“जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी, अब कलेक्ट्रेट में मैराथन बैठकों का दौर… आखिर इतने दिन कहां थे जनप्रतिनिधि?”
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
Mob : 09977708976
Date : 29/05/2026
शिवपुरी / मध्यप्रदेश के शिवपुरी शहर में इन दिनों भीषण जल संकट ने आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच शहर की जनता एक-एक बूंद पानी के लिए दर-दर भटक रही है। कई वार्डों में नलों ने जवाब दे दिया है, टैंकरों के पीछे लंबी कतारें लग रही हैं और महिलाएं घंटों पानी भरने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
लेकिन जब जनता की पीड़ा चरम पर पहुंच गई, तब जाकर केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद Jyotiraditya Scindia के कुछ जनप्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के साथ मैराथन बैठक का दौर शुरू हुआ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने दिनों तक ये जनप्रतिनिधि कहां थे?
जब जनता पानी के लिए सड़कों पर परेशान थी, तब जिम्मेदार नेताओं की नींद क्यों नहीं टूटी?
बैठक में जसवंत जाटव, राकेश गुप्ता, बनस्थली होटल के हरिओम राठौर, केशव तोमर, हरवीर रघुवंशी, योगेंद्र रघुवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शिवपुरी विधायक Devendra Jain और नगर पालिका अध्यक्ष Gayatri Sharma इस अहम बैठक से नदारद दिखे।
अब शहर में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि आखिर भाजपा के ही जनप्रतिनिधि एक मंच पर क्यों नजर नहीं आ रहे?
क्या डबल इंजन सरकार के बावजूद शिवपुरी भाजपा में अंदरूनी खींचतान और अंतरकलह चरम पर है?
क्या जनता की प्यास भी अब राजनीतिक गुटबाजी की भेंट चढ़ रही है?
शहरवासियों का कहना है कि अगर समय रहते जल संकट पर गंभीरता दिखाई जाती, तो आज हालात इतने भयावह नहीं होते। जनता पूछ रही है कि करोड़ों के विकास दावों के बावजूद आखिर शिवपुरी प्यासा क्यों है?
कलेक्ट्रेट में बैठकों और आश्वासनों का दौर जरूर जारी है, लेकिन सवाल वही है —
क्या सिर्फ बैठकों की तस्वीरों से शिवपुरी की प्यास बुझेगी?
जनता को अब भाषण नहीं, घर-घर पानी चाहिए।

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