खनिज माफिया के 'कलेक्टर' बने सर्वेयर सोनू श्रीवास, वसूली के आरोपों के दो वीडियो वायरल, क्या भ्रष्टाचार के संरक्षक बने बैठे हैं वरि...
खनिज माफिया के 'कलेक्टर' बने सर्वेयर सोनू श्रीवास, वसूली के आरोपों के दो वीडियो वायरल, क्या भ्रष्टाचार के संरक्षक बने बैठे हैं वरिष्ठ अधिकारी••?
शिवपुरी। शिवपुरी जिले में खनिज विभाग भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। आलम यह है कि जिस विभाग पर अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है, उसी के कारिंदे खुलेआम 'महीना' वसूल रहे हैं। गुरुवार और शुक्रवार को खनिज विभाग के प्रभारी निरीक्षक सोनू श्रीवास के दो अलग-अलग वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की साख तार-तार हो गई है। इन वीडियो ने न केवल श्रीवास, बल्कि उन्हें कुर्सी पर बैठाने वाले कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी और जिला खनिज अधिकारी रामसिंह उइके की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
सर्वेयर को बनाया 'साहब', क्या है इस मेहरबानी का राज••?
हैरानी की बात यह है कि सोनू श्रीवास मूल रूप से विभाग में एक सर्वेयर हैं, लेकिन कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी ने उन पर ऐसी 'कृपा' बरसाई कि उन्हें निरीक्षक का प्रभार सौंप दिया। चर्चा है कि इस सर्वेयर पर रसूखदार राजनीतिक आकाओं का हाथ है, जिसकी बदौलत वह जिले भर के अवैध उत्खननकर्ताओं से सांठगांठ कर वसूली का सिंडिकेट चला रहा है।
5000₹ तो क्या, एक बोतल में भी मान जाते हैं श्रीवास"
गुरुवार को वायरल हुए पहले वीडियो ने विभाग की इज्जत नीलाम कर दी। बाँस खेड़ी गाँव के भूरा सरदार ने कैमरे के सामने कबूल किया कि वह सोनू श्रीवास को 5000 रुपये की रिश्वत देता है। उसने यहाँ तक कह दिया कि जब ज्यादा ट्रैक्टर चलते थे, तब ज्यादा पैसे दिए जाते थे। सरदार ने तंज कसते हुए कहा कि "सोनू श्रीवास 5000 तो छोड़ो, एक हजार और शराब की एक बोतल में भी मान जाते हैं।" क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी इतना गिर चुका है••?
वसूली में देरी हुई तो तहसीलदार से करा दी कार्रवाई!
दूसरा मामला शुक्रवार का है, जहाँ गजराज रावत नामक व्यक्ति ने सोनू श्रीवास की कार्यशैली की पोल खोली। गजराज का आरोप है कि वह एक साल तक 5000 रुपये महीना श्रीवास को देता रहा। लेकिन जब एक बार पैर में चोट लगने के कारण पैसे देने में 4 दिन की देरी हुई, तो सोनू ने रंजिश निकालते हुए तहसीलदार के माध्यम से उसका ट्रैक्टर जब्त करा दिया और किसी दूसरे डंपर का केस भी उसके ऊपर लगा दिया जिसमे 3 लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना उस पर मढ़ दिया। यह साफ दिखाता है कि यहाँ कानून का राज नहीं, बल्कि वसूली का राज चल रहा है।
सिंध नदी छलनी, लेकिन 'मौन' है खनिज विभाग
करेरा और पिछोर तहसील में अवैध उत्खनन के वीडियो रोजाना वायरल हो रहे हैं। सीहोर थाना क्षेत्र में सिंध नदी के सीने को पनडुब्बियों से चीरा जा रहा है, लेकिन खनिज विभाग के जिम्मेदारों ने जैसे अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली है। सूत्रों का दावा है कि जिले में रेत ठेकेदारों का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक 'हिस्सा' पहुँचाता है। इसीलिए माफियाओं पर हाथ डालने की हिम्मत किसी में नहीं है।
जवाबदेही से बचते अफसर: क्या कलेक्टर लेंगे एक्शन••?
जिला खनिज अधिकारी रामसिंह उइके पर भी इस काले कारोबार में संलिप्त होने के आरोप लग रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल जिले के मुखिया कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी पर है कि “एक सर्वेयर को निरीक्षक का प्रभार देकर वसूली की खुली छूट क्यों दी गई••? ”भ्रष्टाचार के आरोप और सबूत सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं, फिर भी सोनू श्रीवास कुर्सी पर क्यों जमे हैं••? “क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जाँच होगी या फिर 'लेन-देन' के खेल में फाइल दबा दी जाएगी••?
शिवपुरी की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो गया है या फिर साहबों की जेबें भरने के लिए जिले के संसाधनों की लूट की खुली छूट दे दी गई है?

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