शिवपुरी में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, निरीक्षण और कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न शिवपुरी, 21 जून 2026। ...
शिवपुरी में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, निरीक्षण और कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न
शिवपुरी, 21 जून 2026। महिलाओं और बच्चों के विकास, पोषण सुरक्षा एवं कल्याण की जिम्मेदारी संभालने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर शिवपुरी जिले में लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में विभाग की 9 परियोजनाएं संचालित हैं, जिनके अंतर्गत लगभग 2508 आंगनबाड़ी केंद्र और करीब 1400 पोषण एवं भोजन समूह संचालित किए जा रहे हैं। विभाग में लगभग 71 महिला सुपरवाइजर कार्यरत हैं, जिन पर योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है।
विभाग के माध्यम से लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित महिलाओं और बच्चों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर निरीक्षण व्यवस्था और विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले के अनेक आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा है। केंद्र समय पर खुल रहे हैं या नहीं, बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार पोषण आहार मिल रहा है या नहीं तथा योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है या नहीं, इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विभागीय निगरानी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। निरीक्षण रिपोर्ट, नोटिस और कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रही है।
विभाग का इतिहास भी विवादों से जुड़ा रहा है। पूर्व में पोहरी परियोजना अधिकारी नीलम पटेरिया को आंगनबाड़ी नियुक्तियों में रिश्वत के आरोपों के चलते निलंबित किया गया था। वहीं कोलारस की पूर्व परियोजना अधिकारी पूजा स्वर्णकार को भी परियोजना अधिकारी पद से हटाया जा चुका है।
वर्तमान में नरवर परियोजना अधिकारी रवि पाराशर को बदरवास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। शिवपुरी शहर परियोजना अधिकारी नीरज गुर्जर के पास पोहरी का अतिरिक्त प्रभार है, जबकि शिवपुरी ग्रामीण परियोजना अधिकारी अमित यादव को कोलारस परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछोर में अरविंद कुमार तिवारी, खनियाधाना में प्रियंका बुनकर तथा करैरा में सत्यपाल शेखर पदस्थ हैं।
जब विभागीय निरीक्षण और कार्रवाई को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो परियोजना अधिकारी नीरज गुर्जर, परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर और परियोजना अधिकारी अरविंद कुमार तिवारी ने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी धीरेंद्र जादौन ने चर्चा के दौरान बताया कि विभाग द्वारा प्रत्येक माह शासन की योजनाओं की समीक्षा की जाती है तथा समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नियमित निरीक्षण, समीक्षा और कार्रवाई की जा रही है तो उनकी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं आ रही है। आखिर आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति, पोषण आहार वितरण की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी?
यदि परियोजना अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित रहेंगे और जमीनी स्तर पर निगरानी नहीं करेंगे तो विभाग की योजनाओं का प्रभावी संचालन कैसे होगा? महिलाओं और बच्चों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग में होने वाले निरीक्षण, कार्रवाई और जवाबदेही पर से पर्दा कब उठेगा, यह अब जिले के हजारों हितग्राहियों के बीच बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
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Editor-in-Chief : Vinod Vikat
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