चार फर्मों का 'खतरनाक सिंडिकेट' और सोया हुआ प्रशासन: रॉयल इंफ्रास्ट्रक्चर का अवैध रेत साम्राज्य, क्या अधिकारी भी हैं हिस्सेदार...?...
चार फर्मों का 'खतरनाक सिंडिकेट' और सोया हुआ प्रशासन: रॉयल इंफ्रास्ट्रक्चर का अवैध रेत साम्राज्य, क्या अधिकारी भी हैं हिस्सेदार...?
खनिज अधिकारी बदले पर नहीं बदली किस्मत; रॉयल नेचुरल इंफ्रास्ट्रक्चर के 'सिंडिकेट' के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन
करैरा-नरवर में लीज की आड़ में कर रहे सिंध का सीना छलनी, करोड़ों का राजस्व साफ!
विनोद विकट / शिवपुरी/ जिले के करैरा, नरवर और सीहोर क्षेत्र में इन दिनों कानून का नहीं, बल्कि 'रेत माफिया' का सिक्का चल रहा है। बरसात खत्म होते ही रेत के सौदागरों ने एक बार फिर सिंध और अन्य नदियों का सीना चीरना शुरू कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे "वैधता के चोले" में हो रहा है। रॉयल नेचुरल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन नामक कंपनी ने लीज की आड़ में अवैध उत्खनन का ऐसा जाल बुना है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं...?
लीज का 'कवर' और अवैध का 'ओवर'
सूत्रों के अनुसार, खनन माफियाओं ने प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का नया पैंतरा निकाला है। पहले क्षेत्र में लीज पर खदानें ली जाती हैं, फिर उन्हीं खदानों की आड़ में लीज एरिया से बाहर जाकर अवैध रूप से रेत निकाली जाती है। सालों से लगातार हो रहे उत्खनन के कारण स्वीकृत खदानों में अब रेत बची नहीं है, लिहाजा अब बघेदरी, बीजोर और सिलरा जैसे घाटों पर नियमों की धज्जियां उड़ाकर बिना रॉयल्टी के काला कारोबार खुलेआम जारी है।
चार फर्मों का 'खतरनाक सिंडिकेट'
सूत्र बताते हैं की इस काले कारोबार के पीछे किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं, बल्कि चार बड़ी फर्मों का संगठित गठजोड़ काम कर रहा है। शिव कॉर्पोरेशन, अग्रवाल कॉर्पोरेशन, आर.एस.आई. कॉर्पोरेशन और मल्होत्रा एंड मल्होत्रा कॉर्पोरेशन ने मिलकर “रॉयल नेचुरल इंफ्रास्ट्रक्चर' के नाम से एक सिंडिकेट तैयार किया है। यह सिंडिकेट न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि बिना रॉयल्टी के रेत बेचकर शासन को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा है।
साहब को सब पता है, फिर भी चुप्पी क्यों...?
जिले में खनिज अधिकारी बदले, लेकिन रेत माफियाओं के हौसले आज भी बुलंद हैं। वर्तमान जिला खनिज अधिकारी राम सिंह उईके और खनिज निरीक्षक सोनू श्रीवास को इस अवैध कारोबार की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद, धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। विभाग की यह "चुप्पी" और "देखने-दिखाने वाली नाममात्र की कार्रवाई" सीधे तौर पर माफियाओं के साथ मिलीभगत की ओर इशारा करती है।अब देखना यह होगा कि खबर के प्रकाशन के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर 'रॉयल' माफियाओं के आगे तंत्र ऐसे ही घुटने टेके रहेगा...? लीज सीमा का उल्लंघन: स्वीकृत क्षेत्र से बाहर उत्खनन पर विभाग ने अब तक पैमाइश क्यों नहीं की...? “रॉयल्टी चोरी: बिना रॉयल्टी के सड़कों पर दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों पर अंकुश क्यों नहीं...? ”अधिकारियों की भूमिका: क्या खनिज निरीक्षकों का काम सिर्फ कार्यालय में बैठना है या मौके पर जाकर माफिया के सिंडिकेट को तोड़ना...?

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