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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी खेत सड़क': शिवपुरी में ₹21 लाख डकार गए जिम्मेदार

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी खेत सड़क': शिवपुरी में ₹21 लाख डकार गए जिम्मेदार शिवपुरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य किस कदर भ्रष्ट...

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी खेत सड़क': शिवपुरी में ₹21 लाख डकार गए जिम्मेदार


शिवपुरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य किस कदर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं, इसका एक सनसनीखेज मामला जनपद पंचायत शिवपुरी की ग्राम पंचायत रातीकिरार में सामने आया है। यहाँ कागजों पर तो 1.80 किलोमीटर लंबी सड़क और तीन पुलिया बनकर तैयार हो गईं, लेकिन धरातल पर धूल के अलावा कुछ भी नहीं है। मामले का खुलासा जिला पंचायत सदस्य अवधेश सिंह की शिकायत के बाद हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीण यंत्रिकी सेवा (RES) विभाग द्वारा वर्ष 2020-21 में रतिकिरार में एक 'नवीन खेत सड़क' स्वीकृत की गई थी। यह सड़क रामचरण धाकड़ के खेत से पूरन धाकड़ के खेत तक बनाई जानी थी।

परियोजना का विवरण:

कुल स्वीकृत राशि: ₹40,91,000

अब तक निकाली गई राशि: ₹20,64,845

तकनीकी स्वीकृति (TS): क्रमांक 299 (दिनांक 17/09/20)

प्रशासकीय स्वीकृति (AS): क्रमांक 4727 (दिनांक 26/09/20)

जांच में खुली पोल: मौके पर सड़क का नामोनिशान नहीं

शिकायतकर्ता और जिला पंचायत सदस्य अवधेश सिंह ने बताया कि जब उन्होंने ग्रामीणों की शिकायत पर मौके का मुआयना किया, तो वे दंग रह गए। जिस सड़क के नाम पर विभाग द्वारा लगभग 21 लाख रुपये आहरित कर लिए गए, वहां वास्तविकता में कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है।

"*मैने स्वयं मौके पर जाकर देखा है, वहां न तो कोई रोड डाली गई है और न ही पुलिया का निर्माण हुआ है। विभाग और पंचायत के जिम्मेदारों ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को चूना लगाया है। यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की चोरी है।"*

— अवधेश सिंह, सदस्य - जिला पंचायत

अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ता आक्रोश

हैरानी की बात यह है कि बिना काम हुए लाखों रुपये का भुगतान कैसे कर दिया गया? नियमानुसार, काम के अलग-अलग चरणों में मूल्यांकन (Valuation) के बाद ही राशि जारी की जाती है। ऐसे में RES विभाग के इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

फिलहाल, इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और सरकारी राशि की वसूली की जाए।

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