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मेडिकल कॉलेज : लाइफ लाइन नहीं, लापरवाही और गुंडागर्दी का अखाड़ा...?

 *👉 मेडिकल कॉलेज : लाइफ लाइन नहीं, लापरवाही और गुंडागर्दी का अखाड़ा...?* *✍️लावारिस शहर..✍️* शिवपुरी /सोचा था मेडिकल कॉलेज खुलेगा तो शहर की...

 *👉मेडिकल कॉलेज : लाइफ लाइन नहीं, लापरवाही और गुंडागर्दी का अखाड़ा...?*

*✍️लावारिस शहर..✍️*



शिवपुरी /सोचा था मेडिकल कॉलेज खुलेगा तो शहर की सेहत बचेगी, इलाज सस्ता होगा, जानें बचेंगी…,मगर हकीकत यह निकली कि सेवाएं सुधरने की जगह चरमरा गईं और कॉलेज इलाज का नहीं, अराजकता का केंद्र बनता चला गया।

कोरोना काल याद कीजिए जब हर तीसरा मरीज मौत से हार गया, तब न सिस्टम दिखा, न संवेदना। उस दौर ने मेडिकल कॉलेज की असली तस्वीर उजागर कर दी।

शहर भर में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की प्राइवेट क्लीनिकें सब्ज़ी मंडी की तरह सज गईं, और मेडिकल कॉलेज मरीजों को वहाँ धकेलने का माध्यम बन गया। नतीजा यह हुआ कि इसके कारण खैराती अस्पताल की व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई।

आज हालात ये हैं कि मरीज मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के बीच फुटबॉल बना घूमता है ओर पूर्व की तरह "रेफर टू ग्वालियर"का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।

हालात यह है कि आज मेडिकल कॉलेज में इलाज के नाम पर क्या मिलता है...?सार्वजनिक गुंडागर्दी।मरीजों के परिजनों से अभद्रता, मारपीट,ओर यदि पत्रकार सवाल पूछ लें तो उनसे भी बदसलूकी,मारपीट,गुंडागर्दी.?

बीते रोज भी शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में एक आत्महत्या के प्रयास के मामले को दबाया जा रहा था। जब पत्रकार ने डॉक्टर का पहला वीडियो बनाया तो पत्रकार को धमकी दी कि वीडियो नहीं बनना चाहिए..., इसके बाद अस्पताल चौकी में वीडियो चेक करने के नाम पर पत्रकार के मोबाइल से वीडियो डिलीट किये गए, जबरन माफी मंगवाई गयी,मारपीट,गालीगलौच की गयी, यहाँ तक कि पुलिस कर्मियों से भी अभद्रता हुई।इस षड्यंत्र में मेडिकल कॉलेज का स्टाफ शामिल रहा...।आखिर क्या है ये...?

आखिर क्यों शाशन,प्रशाशन,जनप्रतिनिधि सब पंगु बने बैठे है...?

ये सब अब अपवाद नहीं, रोज़ का चलन बन चुका है।डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं यह हमने सुना था लेकिन यहाँ मौजूद सफेद कोट पहनी जमात में संवेदना नहीं, सिर्फ़ दादागिरी बोलती है।इसका सबसे बड़ा नुकसान क्या है...?क्या शहर की छवि धूमिल नही  हो रही है..?क्या स्वास्थ्य सेवाओं से आम आदमी का भरोसा नही टूट रहा है..?क्या मरीज या परिजन इलाज से ज़्यादा डर साथ लेकर नही लौट रहे..?

सवाल सीधा है।

👉प्रश्न उठता है कि क्या मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए है या निजी कमाई और गुंडागर्दी के संरक्षण के लिए?प्रश्न उठता है कि आखिर मेडिकल कॉलेज,होस्टल के भीतर ऐसा क्या होता है जिसे छुपाया जा रहा है..?अगर अब भी जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह संस्थान लाइफ लाइन नहीं, खतरे की लाइन बन जाएगा।

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