फाइलों में 'सुपरफास्ट', जमीन पर 'हाफ' रहा शिवपुरी का ट्रांसपोर्ट नगर सियासी रस्साकशी और अफसरों की 'नूर कुश्ती' मे...
फाइलों में 'सुपरफास्ट', जमीन पर 'हाफ' रहा शिवपुरी का ट्रांसपोर्ट नगर
सियासी रस्साकशी और अफसरों की 'नूर कुश्ती' में फंसा 51 करोड़ का भविष्य; 1.5 साल से बिजली कंपनी को नहीं मिला सर्वे का 'मुहूर्त'
शिवपुरी | शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और व्यापारियों को व्यवस्थित ठिकाना देने का सपना 'बांसखेड़ी' की ऊसर जमीन पर दम तोड़ रहा है। 150 बीघा में आकार लेने वाला ट्रांसपोर्ट नगर फिलहाल विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लकवे की मिसाल बन गया है। आलम यह है कि ईंट-पत्थर तो जुड़ गए, लेकिन सिस्टम की नियत अभी भी कच्ची है।
1. कुर्सी की लड़ाई, विकास की विदाई
नगर पालिका परिषद की बैठकें शहर के विकास के लिए कम और आपसी 'शक्ति प्रदर्शन' के लिए ज्यादा जानी जा रही हैं। मार्च 2026 के सम्मेलन में 60 दुकानों और 79 प्लॉटों की बिक्री पर मुहर लगनी थी, लेकिन 'माननीयों' की आपसी खींचतान ने इस पर ब्रेक लगा दिया। नतीजा? दुकानें बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें ताले लटके हैं।
2. बिजली विभाग की 'कछुआ चाल'
नगर पालिका का दावा है कि डेढ़ साल से बिजली कंपनी को 'प्रेम पत्र' (रिमाइंडर) लिखे जा रहे हैं, लेकिन बिजली कंपनी के साहबों के पास एक सर्वे तक का वक्त नहीं है। डीजीएम साहब को तो पत्र की जानकारी तक नहीं है। यह लापरवाही बताती है कि विभागों के बीच तालमेल 0 है।
3. बजट की 'सड़क' पर गड्ढे
हैरानी की बात है कि करोड़ों का प्रोजेक्ट बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। PWD की फाइल शासन के गलियारों में बजट के इंतजार में 'पार्किंग' में खड़ी है। बिना सड़क के ट्रांसपोर्ट नगर कैसा? यह तो वही बात हुई कि दूल्हा तैयार है पर बारात के लिए रास्ता ही नहीं है।
शिवपुरी ट्रांसपोर्ट नगर की कुंडली: ₹51 करोड़ का बजट, बांसखेड़ी में 150 बीघा जमीन, 60 दुकानें तैयार, लेकिन परिषद की NOC, महंगी दरों और बिजली सर्वे के कारण 10 किमी दूर विकास अटका।
डेडलाइन का अकाल: जब 2023 में बजट मंजूर हुआ, तो 2026 तक पहले फेस का काम पूरा क्यों नहीं हुआ? इस देरी से जो लागत (Cost Escalation) बढ़ेगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा?
दुकानदारों का दर्द: ट्रांसपोर्टर विस्थापन (Displacement) मांग रहे हैं और प्रशासन प्लॉट बेचना चाहता है। क्या बीच का कोई रास्ता (जैसे लीज रेंटल मॉडल) नहीं निकाला जा सकता?
अंधेरे में भविष्य: बिजली कंपनी और नपा के बीच 'पत्राचार' का खेल कब बंद होगा? क्या कलेक्टर महोदय को इन दोनों विभागों को एक टेबल पर नहीं बिठाना चाहिए?
अगर यही रफ्तार रही, तो बांसखेड़ी का यह ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारियों का ठिकाना बनने से पहले ही 'खंडहर' घोषित हो जाएगा। जिम्मेदारों को अब कागजों से बाहर निकलकर जमीन पर उतरना होगा।

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