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2028 की आहट: शिवपुरी में अभी से सियासी बिसात बिछने लगी

2028 की आहट: शिवपुरी में अभी से सियासी बिसात बिछने लगी केपी यादव के बयान से गरमाई राजनीति, नरोत्तम मिश्रा का दौरा भी चर्चा में; पांचों विधान...


2028 की आहट: शिवपुरी में अभी से सियासी बिसात बिछने लगी

केपी यादव के बयान से गरमाई राजनीति, नरोत्तम मिश्रा का दौरा भी चर्चा में; पांचों विधानसभा क्षेत्रों में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ी








शिवपुरी। विधानसभा चुनाव 2028 में अभी करीब दो वर्ष का समय बाकी है, लेकिन शिवपुरी जिले में चुनावी राजनीति की हलचल अभी से तेज होती दिखाई दे रही है। नेताओं के दौरे, बयान, जनसंपर्क और राजनीतिक गतिविधियों ने आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि भाजपा के भीतर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं से जुड़े नेताओं की सक्रियता भी अब नजर आने लगी है।

हाल ही में पूर्व सांसद केपी यादव शिवपुरी पहुंचे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि यदि पार्टी उन्हें मौका देती है तो वे शिवपुरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद जिले की राजनीति में अचानक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। केपी यादव का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पराजित किया था। बाद में सिंधिया भाजपा में शामिल हुए और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हैं।

केपी यादव के साथ पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। दोनों नेताओं को साथ देखे जाने के बाद भाजपा के भीतर संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि अभी किसी भी सीट पर प्रत्याशी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

नरोत्तम मिश्रा के दौरे से भी बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

इसी बीच मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और दतिया के पूर्व विधायक नरोत्तम मिश्रा का शिवपुरी दौरा भी राजनीतिक रूप से चर्चा में रहा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राजनीतिक बयान दिए। भाजपा के वरिष्ठ नेता के शिवपुरी आगमन को भी जिले में पार्टी की आगामी गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

भाजपा में तीन प्रमुख राजनीतिक धाराओं पर नजर

शिवपुरी जिले की भाजपा राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के समर्थक और राजनीतिक समूह सक्रिय रहे हैं। नरेंद्र सिंह तोमर, यशोधरा राजे सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़े नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान और प्रभाव है। आने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के समय इन राजनीतिक समीकरणों का असर कितना रहता है, यह महत्वपूर्ण सवाल होगा।

केपी यादव के बयान के बाद अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि शिवपुरी विधानसभा सीट पर भाजपा किस चेहरे को मैदान में उतारती है। हालांकि अभी चुनाव दूर है, लेकिन संभावित दावेदारों की सक्रियता को देखते हुए टिकट की राजनीति समय के साथ और तेज होने की संभावना है।

पोहरी और कोलारस में भी तैयारियों के संकेत

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में दिलीप मुद्गल की सक्रियता चर्चा में है। क्षेत्र में लगातार संपर्क और राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए वे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में बताए जा रहे हैं।

वहीं कोलारस विधानसभा क्षेत्र में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रविंद्र की सक्रियता भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्र में उनकी गतिविधियों को आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के वर्तमान विधायक कैलाश कुशवाहा भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं। वहीं करैरा और पिछोर विधानसभा क्षेत्रों में भी विभिन्न नेताओं की सक्रियता, जनसंपर्क और समय-समय पर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी से चुनावी माहौल बनने लगा है।

पांच सीटें, कई चेहरे और बदलते समीकरण

शिवपुरी जिले की पांच विधानसभा सीटों—शिवपुरी, पोहरी, कोलारस, करैरा और पिछोर—पर अगले चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में संभावित दावेदारों की सक्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

फिलहाल किसी भी दल ने 2028 के लिए उम्मीदवारों को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने इतना संकेत जरूर दे दिया है कि शिवपुरी में 2028 की चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। अब देखना यह होगा कि समय के साथ कौन सा चेहरा मजबूत होता है और पार्टी का टिकट किसके हिस्से आता है।

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