खाकी का खौफ खत्म! शिवपुरी में सिंध और महुअर की छाती चीर रहे रेत माफिया, कार्रवाई के बाद भी थमती नहीं 'अवैध रफ्तार' शिवपुरी। जिले ...
खाकी का खौफ खत्म! शिवपुरी में सिंध और महुअर की छाती चीर रहे रेत माफिया, कार्रवाई के बाद भी थमती नहीं 'अवैध रफ्तार'
शिवपुरी। जिले में रेत का अवैध कारोबार इस कदर हावी है कि अब खनन माफियाओं के मन से प्रशासन का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों और जिला प्रशासन की दिन-रात की छापामार कार्रवाई के बावजूद, शिवपुरी की नदियों से रेत चोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर इन माफियाओं को इतनी ताकत मिल कहाँ से रही है कि जब्तियों और एफआईआर के बाद भी ये अगले ही दिन नई मशीनों के साथ नदियों में उतर आते हैं?
इन इलाकों में चल रहा है 'काली कमाई' का खेल
शिवपुरी जिले में रेत उत्खनन के सबसे संवेदनशील केंद्र सिंध नदी के किनारे बसे गांव हैं। विशेष रूप से करैरा, नरवर, पिछोर और कोलारस क्षेत्र के दर्जनों गांवों में अवैध उत्खनन जोरों पर है।
करैरा और नरवर: यहाँ सिंध नदी के तटों पर कल्याणपुर, सड, और सिलरा जैसे घाटों पर माफिया सबसे अधिक सक्रिय हैं। यहाँ पानी के भीतर से रेत निकालने के लिए प्रतिबंधित पनडुब्बियों का सहारा लिया जा रहा है।
कोलारस: हाल ही में कोलारस बायपास और नानीपुरा क्षेत्र में अवैध भंडारण के बड़े ठिकाने पकड़े गए हैं।
पिछोर: यहाँ के जुंगीपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध खनन की जड़ें काफी गहरी हैं।
प्रशासन की अब तक की कार्रवाई: शिकंजा या सिर्फ रस्म अदायगी?
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पिछले कुछ महीनों में बड़ी कार्रवाईयां देखने को मिली हैं:
वाहनों की जब्ती: हालिया छापों में कोलारस और पिछोर से आधा दर्जन डंपर और सोनालिका ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं।
पनडुब्बियों पर प्रहार: सिंध नदी में अवैध खनन के लिए उपयोग की जा रही अवैध पनडुब्बियों को प्रशासन ने मौके पर ही आग के हवाले कर माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है।
एफआईआर और जुर्माना: दर्जनों खनिज माफियाओं पर अवैध उत्खनन और परिवहन के मामले दर्ज किए गए हैं, साथ ही कई स्टोन क्रशरों पर भी भारी जुर्माना लगाया गया है।
बैरिकेडिंग और निगरानी: संवेदनशील रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे और नाकेबंदी की योजना बनाई गई है ताकि रात के अंधेरे में होने वाले परिवहन को रोका जा सके।
आखिर कहाँ से मिलती है माफिया को ताकत?
कार्रवाई के बावजूद खनन न रुकने के पीछे एक गहरा नेक्सस काम कर रहा है। सूत्रों की मानें तो स्थानीय राजनीतिक संरक्षण और विभागीय सूचनाओं का लीक होना माफिया के लिए कवच का काम करता है। कई मामलों में तो ईमानदार अधिकारियों के तबादले की साजिशें भी रची जाती हैं। जब तक जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक शिवपुरी की नदियों को इन 'रेत के सौदागरों' से बचाना मुश्किल होगा।
शिवपुरी की जनता अब प्रशासन से 'दिखावटी जब्ती' नहीं, बल्कि 'जड़ से खात्मे' की उम्मीद कर रही है।

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