मौत बाँटता झरना! एक पिकनिक ने बुझा दी चार जिंदगियां गोराटीला के सिद्ध बाबा झरने में नहाने-खाना खाने के बाद एक-एक कर चार बच्चों की मौत, पूरे ...
मौत बाँटता झरना! एक पिकनिक ने बुझा दी चार जिंदगियां
गोराटीला के सिद्ध बाबा झरने में नहाने-खाना खाने के बाद एक-एक कर चार बच्चों की मौत, पूरे इलाके में दहशत
जहरीले पानी का शक, प्रशासन ने लिए 50 ब्लड सैंपल और झरने के पानी के नमूने; जांच रिपोर्ट आने तक झरने के पानी से दूर रहने की अपील
शिवपुरी, 2 सितंबर। रिपोर्ट : दीपक विकेट
जिस झरने के किनारे 16 अगस्त को बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, आज वही झरना चार परिवारों के लिए मातम की वजह बन गया है। बारिश के मौसम में पिकनिक मनाने पहुंचे परिवारों ने झरने में स्नान किया, खाना खाया और शाम को हंसते-खेलते घर लौटे, लेकिन अगले दो सप्ताह में एक के बाद एक चार बच्चों और युवाओं की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
मृतकों में 13 वर्षीय कल्लू उर्फ ताहिर, 18 वर्षीय एजाज, 11 वर्षीय पप्पू उर्फ तारुफ और 8 वर्षीय चिंटू उर्फ तासिफ शामिल हैं। सभी में बुखार, उल्टी-दस्त और पेट संबंधी तकलीफ जैसे लक्षण सामने आने की जानकारी है। मौतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर झरने पर ऐसा क्या हुआ, जिसने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं?
16 अगस्त को पिकनिक... फिर शुरू हुआ मौत का सिलसिला
शिवपुरी के वार्ड क्रमांक 9 हम्माल मोहल्ला और सईसपुरा क्षेत्र के परिवार 16 अगस्त को गोराटीला के सिद्ध बाबा झरने पर पिकनिक मनाने पहुंचे थे। करीब 15 लोग इस टोली में शामिल थे। बच्चों ने झरने में स्नान किया और सभी ने वहीं भोजन किया।
किसी को अंदाजा नहीं था कि घर लौटने के बाद हालात इतने भयावह हो जाएंगे।
18 अगस्त को 13 वर्षीय ताहिर के पेट में तकलीफ शुरू हुई। उपचार के बावजूद हालत बिगड़ती गई और 21 अगस्त को अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
इसके बाद 18 वर्षीय एजाज की तबीयत बिगड़ी। तेज बुखार, उल्टी-दस्त के बाद उसे शिवपुरी में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर ग्वालियर रेफर किया गया, लेकिन 27 अगस्त को उसने भी दम तोड़ दिया।
इसी दिन 11 वर्षीय पप्पू और 8 वर्षीय चिंटू की तबीयत बिगड़ी। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। 31 अगस्त को हालत गंभीर होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। मेडिकल कॉलेज पहुंचने के कुछ ही समय बाद पप्पू की मौत हो गई। चिंटू को परिजन ग्वालियर ले गए, लेकिन जयारोग्य अस्पताल में उसकी भी मौत हो गई।
चार मौतों के बाद जागा प्रशासन, अब सैंपलिंग शुरू
लगातार मौतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को तत्काल जांच के निर्देश दिए।
मंगलवार को डॉक्टरों की दो टीमों ने पिकनिक में शामिल लोगों के करीब 50 ब्लड सैंपल लिए। झरने के पानी के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं। अब इन जांचों की रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि मौतों के पीछे संक्रमण था, पानी में कोई विषैला तत्व था, कीटनाशक की मौजूदगी थी या कोई अन्य कारण।
परिजनों का शक—कहीं पानी में तो नहीं घुला जहर?
पीड़ित परिवारों को आशंका है कि खेतों अथवा नालों से बहकर कोई जहरीला कीटनाशक या अन्य पदार्थ झरने के पानी में पहुंचा होगा। नहाने के दौरान पानी शरीर में जाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि अभी यह केवल परिजनों की आशंका है। मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम, मेडिकल रिकॉर्ड और पानी की वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
एक और किशोरी की जांच में समस्या
पिकनिक में शामिल तौकीर अहमद की 17 वर्षीय बेटी ताशीन की जांच में भी समस्या सामने आई है। उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया है और उपचार शुरू कर दिया गया है। चिकित्सकों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।
एसडीएम पहुंचे झरने पर, गांव में सर्वे के निर्देश
कलेक्टर के निर्देश पर कोलारस एसडीएम शिवदयाल धाकड़ प्रशासनिक अमले के साथ सिद्ध बाबा झरने और गोराटीला क्षेत्र पहुंचे। पटवारी, सरपंच और ग्रामीणों के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य विभाग को गांव में सर्वे करने और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने को कहा गया है।
चार मौतों के बाद परिवारों को डेढ़-डेढ़ लाख की मदद
जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को राहत राशि भी दी है। अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त की। रेडक्रॉस की ओर से प्रत्येक परिवार को 1.50 लाख रुपये की राहत राशि का चेक सौंपा गया।
प्रशासन की अपील—जांच पूरी होने तक झरने से रहें दूर
चार मौतों के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से साफ अपील की है कि जांच रिपोर्ट आने तक सिद्ध बाबा झरने के पानी में न नहाएं, पानी न पिएं और घरेलू उपयोग में भी न लें।
अब सबसे बड़ा सवाल...
झरने में ऐसा क्या था जिसने चार जिंदगियां छीन लीं?
क्या पानी दूषित था? क्या उसमें कीटनाशक पहुंचा था? संक्रमण था या कोई और वजह?
इन सवालों का जवाब अब पानी की प्रयोगशाला जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही मिलेगा। चार परिवारों की दुनिया उजड़ चुकी है, लेकिन जांच रिपोर्ट यह जरूर बताएगी कि आखिर उस दिन झरने पर ऐसा क्या हुआ था।




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