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प्रिय राहुल गांधी, उन जैसे मत बन जाना..!

 # खुला_ख़त  प्रिय राहुल गांधी, उन जैसे मत बन जाना..! सबसे पहली बात तो ये कि आपको देश के प्रधानमंत्री के बारे में उस तरह के शब्दों का प्रयोग ...

 #खुला_ख़त 

प्रिय राहुल गांधी, उन जैसे मत बन जाना..!



सबसे पहली बात तो ये कि आपको देश के प्रधानमंत्री के बारे में उस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जैसा आपने एक जनसभा में किया है।


आप डॉनल्ड ट्रंप के हवाले से कुछ कह रहे थे तब भी शब्दों के चयन में सतर्कता बरतना चाहिए।


व्यक्ति के तौर पर अपनी कथनी करनी से नरेंद्र मोदी भले ही सम्मान के योग्य न रहे हों लेकिन वे जिस पद पर हैं उसका मान रखना ही चाहिए। 


भले ही ख़ुद उन्होंने कभी अपने पद की गरिमा का मान नहीं रखा हो तब भी।


हां हम जानते हैं कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपकी मां के लिए 'जर्सी गाय' जैसे शब्दों का प्रयोग किया है।


तब भी उनका जैसे मत बन जाना।


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने आपकी मां को 'कांग्रेस की विधवा' कहा है।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने आपकी मां के लिए बेहद अभद्र तरीके से कहा था कि 'वो चुनाव नहीं लड़ेगी भाग जाएगी।'


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


(हो सकता है आप न जानते हों... चंबल घाटी में मां का इतना अपमान होने पर तो बेटे बंदूक उठा लेते हैं।)


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने आपके परनाना, आपकी शहीद दादी, आपके शहीद पिता के बारे में भी निरंतर स्तरहीन, अभद्र, अशालीन, असभ्य भाषा का प्रयोग किया है।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने आपके एक सहयोगी की दिवंगत पत्नी को 'पचास करोड़ की गर्ल फ्रेंड' कहा है।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने आपकी पार्टी की एक महिला सांसद की हंसी की तुलना शूर्पणखा की हंसी से की है।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी ने एक महिला मुख्यमंत्री को सड़कछाप अंदाज़ में मंच से दीदी ओ दीदी संबोधित किया था।


तब भी उन जैसे मत बन जाना।


हां हम जानते हैं कि उनकी भाषा मुजरा, मंगलसूत्र, भैंस, जैसे शब्दों से सुशोभित होती है जो कि प्रधानमंत्री पद के अनुरूप कदापि नहीं होती।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि नरेंद्र मोदी और उनके संगठन ने आपकी चरित्र हत्या, आपकी छवि हत्या के लिए हजारों करोड़ रु खर्च करके अभियान चलाया है, आज भी चल रहा है।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि आज़ाद भारत के इतिहास में झूठ और नफ़रत के जरिए जितना अपमान आपका और आपके परिजनों का किया गया है उतना किसी का नहीं।


तब भी उनके जैसा नहीं बन जाना।


हां हम जानते हैं कि सार्वजनिक जीवन में जो कुछ आपने सहा है उसके कारण आपके भीतर आक्रोश का लावा धधक रहा होगा जो कभी कभार बाहर आ जाता है लेकिन उसे भीतर ही रहने दीजिए। 

उसे जुबान पर मत लाइए।


वैसे भी महात्मा गांधी ने विचार और शब्द की हिंसा से भी बचने को कहा है। आपको इससे बचना चाहिए।


एक नागरिक के तौर पर हमें हक़ है कि हम आपकी इस तरह की भाषा पर आपत्ति दर्ज़ कराएं।  


ये हक़ हमें इसलिए भी है क्योंकि जब हम नरेंद्र मोदी की भाषा पर ऐतराज करते हैं तो आपको भी नहीं बख्शेंगे।


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हमारा एक सवाल ये भी..


अगर अच्छे दिनों में नरेंद्र मोदी की बराक ओबामा से 'तू तड़ाक' में बात होती थी तो बुरे दिनों में डॉनल्ड ट्रंप 'तू तड़ाक' में धमकी नहीं दे सकते क्या?


नोट : राहुल को नसीहत देने वाले पहले अपने गिरेबान में झांक कर बताएं कि जब जब नरेंद्र मोदी ने स्तरहीन शब्द बोले तब वे कहां थे?

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