शिवपुरी में ज़मीन विवाद एक गंभीर और आम समस्या है, जिसके कारण अक्सर हिंसक झड़पें होती हैं और कई कानूनी मामले चल रहे हैं। हाल के कुछ प्रमुख ...
शिवपुरी में ज़मीन विवाद एक गंभीर और आम समस्या है, जिसके कारण अक्सर हिंसक झड़पें होती हैं और कई कानूनी मामले चल रहे हैं। हाल के कुछ प्रमुख मामले और घटनाएँ इस प्रकार हैं:
हाल की प्रमुख घटनाएँ और मामले
शिवपुरी / हिंसक झड़पें: अक्टूबर 2025 में, शिवपुरी जिले के बामोरकला थाना क्षेत्र में जमीन विवाद के दौरान हुई मारपीट और हत्या के प्रयास के मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह, अक्टूबर 2025 में भी जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमले की खबर सामने आई थी।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण: अगस्त 2025 में, गोवर्धन थाना क्षेत्र के मानिकपुर गांव में सरकारी जमीन पर भैंस चराने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया, जिसमें 9 लोग घायल हुए और 18 लोगों पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई।
अतिक्रमण हटाना: जुलाई 2025 में, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 275 बीघा वन भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराया था। इसके अलावा, प्रशासन ने निवेश के लिए भी 81 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमण से खाली कराई है।
पारिवारिक विवाद: सितंबर 2025 में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहाँ ससुराल की जमीन न चाहने पर एक व्यक्ति के बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी। सितंबर 2025 में दो भाइयों के बीच प्लॉट विवाद में मारपीट हुई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए।
उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले: जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने शिवपुरी शहर की सैकड़ों करोड़ रुपये की एक जमीन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया गया जिसने इसे मंदिर की संपत्ति माना था, जिससे 70 हजार निवासियों को बेदखली से राहत मिली।
जमीन विवाद के मुख्य कारण
अवैध कब्जा और अतिक्रमण: सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे के मामले आम हैं।
दस्तावेज संबंधी समस्याएँ: कई बार गुम या गलत दस्तावेज़, सरकारी रिकॉर्ड में गलतियाँ या फर्जी स्वामित्व दस्तावेज़ विवादों का कारण बनते हैं।
पारिवारिक/पुश्तैनी संपत्ति विवाद: भाइयों या परिवार के अन्य सदस्यों के बीच पुश्तैनी जमीन के मालिकाना हक को लेकर अक्सर झगड़े होते हैं।
राजस्व विभाग की लापरवाही: कई मामलों में राजस्व विभाग द्वारा सड़कों के पट्टे दे दिए जाने या समय पर कार्रवाई न करने से भी विवाद गहराते हैं।
प्रशासन के प्रयास
जिला प्रशासन भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है और अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पीड़ित अक्सर कलेक्टर या पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हैं और कुछ मामलों में ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का उपयोग करने की भी सलाह दी जाती है (हालांकि यह मुख्य रूप से बिहार का उदाहरण है, मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था हो सकती है)।
ज़मीन विवादों को सुलझाने के लिए दस्तावेज़ों का सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालतों ने भी सभी पक्षों को सुने बिना कार्रवाई न करने पर जोर दिया है।

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