... ना जाने क्यों डरता है मेरा यह शहर, जबकि अच्छे लोग आज भी 95 फीसदी हैं, तो फिर यह 5 परसेंट हावी कैसे हो गए..? शिवपुरी /सिंधिया परिवार का ...
...ना जाने क्यों डरता है मेरा यह शहर, जबकि अच्छे लोग आज भी 95 फीसदी हैं, तो फिर यह 5 परसेंट हावी कैसे हो गए..?
शिवपुरी /सिंधिया परिवार का राजनीतिक नेतृत्व यह शहर इसलिए भी स्वीकार करता है, क्योंकि उनके रहते कोई स्थानीय माफिया या बदमाश हावी नहीं होता..
- एक कड़वा सच यह भी है कि सिंधिया परिवार की ही एक जनप्रतिनिधि के संरक्षण में इन्होंने शहर विकास का बजट ही लूट लिया... हमारा शहर बदहाल हो गया
- शिवपुरी शहर की एक शांत फिजा है, जिसमें अधिकांश लोग अपना कामकाज बिना किसी उलझन के करना चाहते है..
- शहर विकास के लिए आई करोड़ों की राशि को ठिकाने लगाकर अपनी कोठिया बनाने का क्या फायदा रहा, जब शहर में तुम्हे पुलिस लेकर गली गली घूम रही है
- आज भी जनता से बढ़कर कोई नहीं है, और यदि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो उसके लिए आपको ही बोलना पड़ेगा, क्योंकि जुर्म सहना भी जुर्म करने के बराबर का दोष है
- यह एक यूनिवर्सल ट्रुथ है, कि जो आया है वो जाएगा,तो फिर क्या इस अस्थाई प्लेटफार्म पर भी घुट-घुट कर जिंदगी गुजारेंगे..?
- नपा में 4.50 करोड़ से रोड रेस्टोरेशन यानि खुदी सड़कों को रिपेयर करना था। चोर उसे भी डकार गए,और उसकी फाइल ही गायब कर दी।
- हमारे शहर को चंद लुटेरों ने मिलकर लूट लिया, और लोग यह सोचकर चुप रहे, कि हमें क्या लेना देना। क्या यह शहर आपका नहीं है..??
- जब हम चुप रहते हैं, तो मुठ्ठी भर चोर अपनी मनमानी करते हैं। यदि आप इनको जवाब देना शुरू कर दोगे, तो यह फिर पलट कर नहीं आयेंगे।
- चोर को यदि चोर कह दिया, तो वो आधा खत्म हो जाता है, क्योंकि वो इस बात से डर जाता है कि मैं चोर हूं, यह सबको पता चल गया।
- अक्सर कहा जाता है कि पुलिस और प्रशासन पर राजनीतिक दबाव रहता है, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया वो नेता हैं, जो ऐसे चोर-लुटरों को बिल्कुल पसंद नहीं करते।
...अब देखते हैं, कि मेरा शहर कितना जागृत होता है...आज लगा कि मैं अपना मर्म आपके सामने रखूं,

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