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पूरे प्रदेश में बिगड़े हैं हालात: जिस मंत्री से कर रहे थे उम्मीद, वो हो अपने दर्द से कराहते मिले

  पूरे प्रदेश में बिगड़े हैं हालात: जिस मंत्री से कर रहे थे उम्मीद, वो हो अपने दर्द से कराहते मिले जब मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही, तो फि...

 पूरे प्रदेश में बिगड़े हैं हालात: जिस मंत्री से कर रहे थे उम्मीद, वो हो अपने दर्द से कराहते मिले

जब मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही, तो फिर जनता का दर्द कौन सुनेगा, हवा हवाई मंत्री के दावे 


शिवपुरी। केंद्रीय मंत्री के आने से पहले पायलेटिंग दौरे पर आए प्रभारी मंत्री ने जब शहर की परेशान जनता ले सामने यह हुंकार भरी कि अब सुधार कार्य दिनों के नहीं घंटों में होंगे। हालांकि जनता को हमने पहले ही बता दिया था कि यह सिर्फ नौटंकी कर सकते हैं, और यह बात उस समय सच हो गई, जब मंत्री केबिनेट की बैठक में अपना दर्द सुनने लगे। उन्होंने कहा कि कलेक्टर और निगमायुक्त मेरी नहीं सुन रहे। अब सवाल यह उठता है कि जब मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही, तो फिर जनता की फरियाद कौन सुनेगा..?

मध्यप्रदेश की राजनीति में डॉ. मोहन यादव का नाम एकाएक मुख्यमंत्री के रूप में दिल्ली से भेजा गया था, जिसके चलते प्रदेश में लाडली बहना योजना की दम पर सरकार बनाने वाले शिवराज सिंह चौहान (मामा) साइड के दिए गए। चूंकि मुख्यमंत्री ही जब दिल्ली की पर्ची से बने तो फिर मध्यप्रदेश अघोषित केंद्रशासित प्रदेश बन गया। जिसके चलते प्रदेश में भाजपा दोफाड़ हो गई। अभी शिवर खेमा और मोहन खेमा ही उलझ रहे थे, कि एक सिंधिया खेमा और बनकर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गया। सिंधिया के नजदीकी जो मंत्री बने, उन्हें पुरानी भाजपा के मंत्री उतना हो बजन दे रहे हैं। यही वजह है कि सिंधिया के मंत्री केबिनेट में अपना दर्द बया कर रहे हैं, तथा यह कहकर अपनी स्थिति बता रहे हैं कि कलेक्टर और निगमायुक्त हमारी नहीं सुन रहे। 

इन हालातों में शिवपुरी की जनता से लेकर नपाध्यक्ष को हटाने की कवायद कर रहे पार्षद भी निराश हैं। क्योंकि प्रभारी मंत्री को दमदार मानकर उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन वापस लेकर अपने ना स्वीकृत होने वाले इस्तीफे भी दे दिए। अब जबकि प्रभारी मंत्री खुद ही असुनवाई का रोना केबिनेट में रो रहे हैं, तो फिर वो शिवपुरी की जनता के आंसू कैसे पोंछेंगे..?

इस एपीसोड को देखने के बाद शहर सहित जिले की जनता भी समझ गई कि मंत्री की बातें और दावे सब हवा-हवाई ही हैं। वो जब अपने विधानसभा क्षेत्र में ही काम नहीं करवा पा रहे, और अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे, तो फिर यह शिवपुरी के बिगड़े हालातों को कैसे सुधार पाएंगे। शायद यह शिवपुरी का दुर्भाग्य ही है कि उसे इनके जैसे प्रभारी मंत्री मिले हैं, जो भ्रष्टाचार करने वालों को बचाने में पूरी दम लगा रहे हैं, और शहर के हालात सुधारने के झूठे दावे जनता से कर रहे हैं।

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