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अंबिका कॉलेज से डी फार्मा करने वाले सभी परीक्षार्थी हुए फैल, 80 हजार से 1 लाख रुपए की फीस गई पानी में

  अंबिका कॉलेज से डी फार्मा करने वाले सभी परीक्षार्थी हुए फैल, 80 हजार से 1 लाख रुपए की फीस गई पानी में  बोले कॉलेज संचालक: रिजल्ट तो बिगड़ा...

 अंबिका कॉलेज से डी फार्मा करने वाले सभी परीक्षार्थी हुए फैल, 80 हजार से 1 लाख रुपए की फीस गई पानी में 

बोले कॉलेज संचालक: रिजल्ट तो बिगड़ा है, लेकिन हम संशोधन करवाकर सभी को पास करवा लेंगे, यूनिवर्सिटी को 10 बार करना पड़ेगा


शिवपुरी। डी फार्मा करके अपना भविष्य संवारने की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब रिजल्ट आया, और सभी फैल हो गए। यह रिजल्ट अंबिका कॉलेज का है, जिसके संचालक का कहना है कि इस बार रिजल्ट बिगड़ गया है, लेकिन हम उसे सुधरवा कर सभी को पास करवा लेंगे। यानि उच्च शिक्षा में भी सब कुछ सेटिंग का चल रहा है, तभी कॉलेज संचालक इतने कॉन्फिडेंट हैं।

दवा उद्योग में अपना केरियर तलाशने वाले युवा डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी फार्मा) का दो वर्षीय डिप्लोमा करते हैं। शिवपुरी सहित आसपास के लगभग 50 से अधिक परीक्षार्थियों ने अंबिका कॉलेज शिवपुरी (मेडिकल कॉलेज के सामने) से फार्म भरा था, जिसके एवज में 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक फीस भी जमा की थी। 

डी फार्मा का जब रिजल्ट आया तो अंबिका कॉलेज से परीक्षा देने वाले सभी परीक्षार्थी फैल हो गए। अनुत्तीर्ण हुए परीक्षार्थियों में शामिल कल्याण ठाकुर का कहना है कि मैने 24 परीक्षार्थियों के रिजल्ट देखे, तो सभी फैल थे। कल्याण का कहना है कि जब हमने एडमिशन लिया था, तब हमसे कहा गया था कि कॉपी-पेपर सभी यहीं मिलेगा, इसलिए तुम टेंशन मत लो, रिजल्ट अच्छा आएगा। लेकिन जब रिजल्ट आया तो एक लाइन से सभी परीक्षार्थी अनुत्तीन हो गए। कल्याण ने बताया कि हमारा परीक्षा सेंटर सतनबाड़ा इंजीनियरिंग कॉलेज में बनाया गया था। अब जबकि रिजल्ट में सभी अनुत्तीर्ण हो गए, तो कॉलेज संचालक भी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। हमारा तो भविष्य ही खराब हो गया तथा मैने तो 80 हजार रुपए फीस जमा की थी। 

जब इस संबंध में कॉलेज संचालक लोकेश जैन से बात की तो उनका कहना था कि 4-5 बच्चे तो पास हुए हैं, लेकिन रिजल्ट बिगड़ गया है। इसकी कई वजह है, तथा राजीव गांधी यूनिवर्सिटी भोपाल तो इसी तरह रिजल्ट बिगाड़ देती है, और फिर संशोधन के लिए कहा जाए तो वो फिर सभी को पास भी कर देती है। 3 साल पहले भी ऐसा ही किया था, लेकिन बाद में उन्होंने सभी को पास भी कर दिया था। यूनिवर्सिटी को तो 10 बार पास करना पड़ेगा। हमने तो लैटर भी भेज दिया है कि इसमें जो भी खर्चा आएगा, वो संस्थान उठाएगा, लेकिन रिजल्ट संशोधित किया जाए। इस प्रक्रिया में 10-12 दिन तो लग जाएंगे। 

यह कैसा गठबंधन..? 

अंबिका कॉलेज के डी फार्मा के स्टूडेंट्स फेल हो गए, लेकिन कॉलेज संचालक लोकेश जैन फुल कॉन्फिडेंट हैं, कि वो सभी को पास करवा लेंगे। तथा इसके लिए होने वाली अतिरिक्त राशि भी संस्था यानी उनका कॉलेज खर्च करने को तैयार है। वो तो उदाहरण भी बता रहे हैं कि 3 साल पहले भी ऐसा हुआ था, लेकिन रिजल्ट संशोधन में सभी पास हो गए थे। इससे तो यही लगता है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी का अच्छा तालमेल है, और वो पहले रिजल्ट बिगाड़ते हैं, तथा अतिरिक्त खर्चा लेकर उसे सुधार भी देते हैं। इसी गठबंधन के चलते ही कॉलेज प्रबंधन 80 हजार से 1 लाख रुपए फीस भी लेता है।

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