Writing शिवपुरी प्यासा, अफसर मस्त! “70% शहर में सूखी टोंटियां, जनता त्राहिमाम — आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?” Indiaaajtak.in Editor-in...
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शिवपुरी प्यासा, अफसर मस्त!
“70% शहर में सूखी टोंटियां, जनता त्राहिमाम — आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?”
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
Mob : 09977708976
Date : 29/05/2026
शिवपुरी / मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में भीषण गर्मी के बीच जल संकट अब विस्फोटक स्थिति में पहुंच चुका है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं। शहर के लगभग 70 प्रतिशत हिस्सों में जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि कई मोहल्लों में महिलाएं और बुजुर्ग रातभर जागकर पानी आने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई परिवार दूर-दराज क्षेत्रों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
कठमई, नवाब साहब का हाता, गांधी कॉलोनी, वार्ड 19-20 और शहर के बाहरी इलाकों में हालात सबसे अधिक भयावह बताए जा रहे हैं। कठमई क्षेत्र में पाइपलाइन और पानी की टंकी बनने के बावजूद लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। कई बोरवेल खराब पड़े हैं और जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल अब शिवपुरी नगर पालिका के ए.ई. सचिन चौहान पर खड़ा हो रहा है। बताया जा रहा है कि सचिन चौहान पिछले लगभग 7 वर्षों से शिवपुरी में जमे हुए हैं और शहर की जल व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं के पास है। इसके बावजूद शहर में पानी की स्थिति लगातार बद से बदतर होती चली गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर जब पानी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? आखिर नगर पालिका प्रशासन और जिले के वरिष्ठ अधिकारी कब तक जनता की परेशानी पर आंखें मूंदे रहेंगे?
उधर ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। गांवों में हैंडपंप सूख चुके हैं, कई जल योजनाएं बंद पड़ी हैं और लोग टैंकरों के भरोसे जीवन गुजार रहे हैं। गरीब परिवार महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं।
सबसे गंभीर सवाल मणिखेड़ा परियोजना को लेकर भी खड़ा हो रहा है। आखिर मणिखेड़ा से पानी सप्लाई क्यों प्रभावित है? करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जनता को राहत क्यों नहीं मिल पा रही? भाजपा शासनकाल में शिवपुरी जल संकट की मार झेल रहा है और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई के बजाय चुप्पी साध ली गई है।
इंडिया आज तक का बड़ा सवाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास मंत्री, कलेक्टर अर्पित वर्मा, नगर पालिका प्रशासन और पीएचई विभाग से — आखिर शिवपुरी की जनता जाए तो जाए कहां?
जब लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तड़प रहे हों, महिलाएं रात के अंधेरे में बाल्टियां लेकर लाइन में खड़ी हों और बच्चे प्यासे सोने को मजबूर हों, तब प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह जल संकट बड़ा जनआक्रोश बन सकता है।



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