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शिवपुरी में जल संकट बना जनआक्रोश!
“जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी, प्रशासन मौन” — इंडिया आज तक का बड़ा सवाल
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Editor-in-Chief : Vinod Vikat
Mob : 09977708976
Date : 29/05/2026
शिवपुरी / मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में भीषण गर्मी के बीच जल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। शहर के लगभग 70 प्रतिशत हिस्सों में जलापूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। कई मोहल्लों में लोग रातभर जागकर पानी आने का इंतजार कर रहे हैं, तो कहीं महिलाएं और बुजुर्ग डेढ़-दो किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में कठमई, नवाब साहब का हाता, गांधी कॉलोनी, वार्ड 19-20 सहित शहर के बाहरी और निचले इलाके शामिल हैं। कठमई क्षेत्र में करोड़ों की लागत से पाइपलाइन और पानी की टंकी बनने के बावजूद लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। कई बोरवेल खराब पड़े हैं और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजों में योजनाएं दौड़ा रहे हैं।
शहर के हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि कई परिवार निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। गरीब परिवार महंगे दामों पर पानी खरीदने को मजबूर हैं। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचई विभाग की लापरवाही भी खुलकर सामने आ रही है। गांवों में हैंडपंप सूख चुके हैं और कई जल योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मणिखेड़ा डैम से पानी क्यों नहीं आ रहा? करोड़ों की योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बावजूद शिवपुरी की जनता प्यास से क्यों जूझ रही है? भाजपा शासनकाल में जल संकट को लेकर पूरे जिले में त्राहि-त्राहि मची हुई है, लेकिन जिम्मेदार अफसर एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे।
इंडिया आज तक का बड़ा सवाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास विभाग, कलेक्टर अर्पित वर्मा, नगर पालिका प्रशासन और जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से —
आखिर जनता जाए तो जाए कहां?
जब शहर की माताएं-बहनें रात के अंधेरे में पानी भरने को मजबूर हों, बच्चे प्यासे सोने लगें और आम आदमी बूंद-बूंद पानी के लिए भटकता फिरे, तब प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल उठना लाजमी है।
शहरी क्षेत्रों में पानी व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, जबकि ग्रामीण इलाकों में पीएचई विभाग जवाबदेह है। लेकिन दोनों ही विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। जनता का आरोप है कि शिकायतों के बाद भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में यह जल संकट जनआक्रोश का बड़ा रूप ले सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन जागता है या फिर शिवपुरी की जनता यूं ही प्यास से तड़पती रहेगी।



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