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शिवपुरी की बदहाली पर जनता का फूटा गुस्सा!

  शिवपुरी की बदहाली पर जनता का फूटा गुस्सा! सत्ता पूरी भाजपा की… फिर भी पानी के लिए तरसता शहर, टूटी सड़कों पर मरती उम्मीदें Indiaaajtak.in E...

 शिवपुरी की बदहाली पर जनता का फूटा गुस्सा!

सत्ता पूरी भाजपा की… फिर भी पानी के लिए तरसता शहर, टूटी सड़कों पर मरती उम्मीदें

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob : 09977708976

Date : 29/05/2026


शिवपुरी /मध्य प्रदेश का शिवपुरी आज सवाल बन चुका है।

सवाल सिर्फ टूटी सड़कों का नहीं…

सवाल सिर्फ सूखे नलों का नहीं…

सवाल सिर्फ बेरोजगार युवाओं का नहीं…

सवाल उन जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता का है, जो सत्ता में बैठकर भी जनता का दर्द नहीं सुन पा रहे।

केंद्र में भाजपा सरकार…

प्रदेश में भाजपा सरकार…

शिवपुरी के सांसद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया…

विधायक देवेंद्र जैन…

नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा…

जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर…

फिर भी शिवपुरी की जनता बदहाली में जिंदगी काट रही है।

शर्म आनी चाहिए उन जनप्रतिनिधियों को…

जो मंचों पर विकास के भाषण देते हैं, लेकिन शहर की गलियों में गंदा पानी बह रहा है।

जो बड़े-बड़े पोस्टर लगवाते हैं, लेकिन महिलाएं आज भी बाल्टी लेकर पानी ढूंढ रही हैं।

जो खुद को जनता का सेवक बताते हैं, लेकिन जनता की चीखें उनके एसी कमरों तक नहीं पहुंच रहीं।

शिवपुरी की सच्चाई क्या है?

सड़कें ऐसी कि हर दिन हादसे का डर

पानी ऐसा कि लोग बूंद-बूंद को मोहताज

बिजली व्यवस्था चरमराई हुई

युवा बेरोजगार और परेशान

नगर पालिका व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में

और दूसरी तरफ नेता सिर्फ फोटो, भाषण और प्रचार में व्यस्त!

जनता पूछ रही है —

क्या शिवपुरी सिर्फ चुनाव के समय याद आता है?

क्या जनता का काम सिर्फ वोट देना रह गया है?

क्या विकास केवल सोशल मीडिया पोस्टों में हो रहा है?

क्या जिम्मेदारों की आत्मा मर चुकी है?

आज शिवपुरी की हालत देखकर ऐसा लगता है जैसे जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया हो।

नेताओं के काफिले निकलते हैं, भाषण गूंजते हैं, लेकिन शहर की बदहाली हर दावे पर तमाचा मारती नजर आती है।

“मसीहा”, “विनम्र” और “बहिन” की राजनीति के बीच पिस रही जनता

जनता तंज कस रही है —

“मसीहा” साहब भाषण बचा रहे हैं

“विनम्र” जी हाथ जोड़कर समय काट रहे हैं

“बहिन” जी पोस्टर छपवा रही हैं

लेकिन शिवपुरी?

वो आज भी टूटी सड़क, सूखे नल और बेरोजगारी के अंधेरे में रो रहा है।

इंडिया आज तक का सीधा सवाल

अगर भाजपा की डबल इंजन सरकार में भी शिवपुरी की जनता को पानी, सड़क और रोजगार नहीं मिल सकता…

तो फिर आखिर जनता किससे उम्मीद करे?

जनप्रतिनिधियों को याद रखना चाहिए —

जनता सब देख रही है…

जनता सब समझ रही है…

और इतिहास कभी माफ नहीं करता।


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