फर्जी वसीयत के सहारे शासकीय पट्टे की जमीन का नामांतरण! लोकायुक्त की जांच में घिरे तत्कालीन तहसीलदार गढ़ीबरौद की जमीन से उठा बड़ा सवाल: क्य...
फर्जी वसीयत के सहारे शासकीय पट्टे की जमीन का नामांतरण! लोकायुक्त की जांच में घिरे तत्कालीन तहसीलदार
गढ़ीबरौद की जमीन से उठा बड़ा सवाल: क्या जिले में सुरक्षित नहीं रही शासकीय भूमि?
- लोकायुक्त ने माना प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता का मामला
- एसीएस राजस्व और कलेक्टर से मांगी गई रिपोर्ट आज तक लंबित
- शिकायतकर्ता का आरोप, जिम्मेदारों ने दबा दी कार्रवाई की फाइल
शिवपुरी, 11 जून 2026।
शिवपुरी जिले में जमीनों से जुड़े विवाद और कथित हेराफेरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। करैरा और कोलारस विधानसभा क्षेत्रों में भूमि प्रकरणों के बाद अब शिवपुरी तहसील के ग्राम गढ़ीबरौद की शासकीय पट्टे की भूमि का मामला सुर्खियों में है। आरोप है कि विक्रय से वर्जित शासकीय पट्टे की जमीन को फर्जी वसीयतनामे के आधार पर नामांतरण कर खुर्दबुर्द कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त संगठन भोपाल ने तत्कालीन तहसीलदार बीएस कुशवाह के खिलाफ शिकायत पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता रघुराज सिंह के अनुसार ग्राम गढ़ीबरौद स्थित सर्वे क्रमांक 368 एवं 379 की भूमि वर्ष 1988-89 के राजस्व अभिलेखों में विक्रय से वर्जित शासकीय पट्टे की भूमि के रूप में दर्ज है। शासन द्वारा यह भूमि मटटूलाल लोहार को पट्टे पर प्रदान की गई थी। नियमों के अनुसार ऐसी भूमि का न तो विक्रय किया जा सकता है और न ही सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना उसका हस्तांतरण संभव है।
बिना अनुमति हुआ पहला नामांतरण
आरोप है कि उक्त भूमि का पहला नामांतरण बलवीर सिंह सरदार पुत्र हजारा सिंह के नाम किया गया, जबकि वह संबंधित गांव का निवासी भी नहीं था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रक्रिया में कलेक्टर की अनिवार्य अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई, जो कि राजस्व नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
फर्जी वसीयत के आधार पर दूसरा नामांतरण
मामले में दूसरा नामांतरण अशोक पुत्र जानकीलाल किरार के नाम किया गया। आरोप है कि अशोक किरार ने बलवीर सिंह के नाम से कथित फर्जी वसीयतनामा तैयार कराकर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। जबकि कानूनी रूप से विक्रय से वर्जित शासकीय पट्टे की भूमि का वसीयतनामा निष्पादित नहीं किया जा सकता।
लोकायुक्त ने मानी गंभीर अनियमितता
लोकायुक्त संगठन भोपाल ने पंजी क्रमांक 2550/सी/2025-26 (विपुस्था-शि.क्र. 576/2025) में दर्ज शिकायत का परीक्षण करते हुए पाया कि नामांतरण आदेश और वसीयत से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां हैं। शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों में वसीयतकर्ता के रूप में अर्जुन सिंह का उल्लेख है, जबकि नामांतरण आदेश में भूमि स्वामी बलवीर सिंह को दर्शाया गया है।
लोकायुक्त ने अपने प्रारंभिक परीक्षण में माना कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा निष्पादित वसीयतनामे के आधार पर भूमि का नामांतरण किया जाना प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता है तथा यह मामला स्टाम्प शुल्क अदा करने से बचने की श्रेणी में भी आ सकता है।
बार-बार शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ता के अनुसार मामले को लेकर उन्होंने 29 जुलाई 2025 को जनसुनवाई में पहला आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद 5 अगस्त, 9 अगस्त और 26 अगस्त 2025 को भी शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में 14 अक्टूबर 2025 को प्रकरण जांच के लिए एसडीओ शिवपुरी को भेजा गया। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी रही।
इसके बाद 9 दिसंबर 2025 को एक बार फिर जनसुनवाई में आवेदन दिया गया। वहीं 7 अक्टूबर 2025 को लोकायुक्त ने शिकायत पंजीबद्ध की और 4 नवंबर 2025 को अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं कलेक्टर शिवपुरी से 5 फरवरी 2026 तक तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा गया। आरोप है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद आज तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
जिले में बढ़ते भूमि विवादों ने खड़े किए सवाल
हाल के दिनों में करैरा विधानसभा क्षेत्र में शासकीय भूमि से जुड़े दो मामले और कोलारस विधानसभा क्षेत्र में भी भूमि विवाद का मामला सामने आ चुका है। लगातार उजागर हो रहे प्रकरणों ने जिले की राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
जनचर्चा का विषय यह भी है कि जब भूमि संबंधी मामलों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की है, तब इस तरह की अनियमितताएं आखिर कैसे सामने आ रही हैं और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनअपेक्षा है कि कलेक्टर अर्पित वर्मा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि किसी स्तर पर लापरवाही, नियम विरुद्ध कार्रवाई अथवा मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में जनता का विश्वास कायम रह सके।
यदि लोकायुक्त की जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल एक नामांतरण विवाद नहीं बल्कि शासकीय भूमि संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला प्रकरण साबित हो सकता है।
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
Mob. : 9977708976
Date : 11/06/2026

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