मंडी में अवैध वसूली का मामला फिर गरमाया, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं कलेक्ट्रेट पहुंचा कृषि उपज मंडी का भ्रष्टाचार मामला, आखिर जांच रिपोर...
मंडी में अवैध वसूली का मामला फिर गरमाया, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
कलेक्ट्रेट पहुंचा कृषि उपज मंडी का भ्रष्टाचार मामला, आखिर जांच रिपोर्ट कहां अटकी?
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
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दिनांक : 15/06/2026
शिवपुरी। कृषि उपज मंडी शिवपुरी में कथित अवैध वसूली, किसानों और व्यापारियों के शोषण तथा प्रशासनिक लापरवाही के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। जनसुनवाई में व्यापारियों द्वारा की गई शिकायत के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा ने मामले की जांच एसडीएम शिवपुरी आनंद राजावत को सौंप दी थी, लेकिन शिकायत किए जाने के कई दिन बाद भी जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इससे व्यापारियों और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पीड़ित व्यापारी शिवकुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि मंडी में पदस्थ एक बाबू द्वारा उनसे शिवपुरी विधायक और मंडी डीएस के नाम पर दस हजार रुपये की मांग की गई थी। जब उन्होंने कथित अवैध वसूली का विरोध किया तो उनके तोल कांटे और अन्य व्यापारिक सामान अपने कब्जे में ले लिए गए। साथ ही उन्हें व्यापार बंद कराने की धमकी भी दी गई।
व्यापारी का कहना है कि सामान वापस नहीं मिलने के कारण उनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
पहले भी विवादों में रह चुका है मंडी का बाबू
जानकारी के अनुसार संबंधित बाबू के खिलाफ पूर्व में भी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कई विवादों में उनका नाम सामने आता रहा है। इसके बावजूद वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने और लगातार आरोप लगने के बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायत पुरानी, लेकिन जांच का कोई अता-पता नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब व्यापारी जनसुनवाई में शिकायत कर चुके हैं, वीडियो भी वायरल हो चुके हैं और कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश भी दिए जा चुके हैं, तो फिर अब तक जांच की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? यदि जांच चल रही है तो उसकी प्रगति क्या है और यदि जांच पूरी हो चुकी है तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यह स्थिति कहीं न कहीं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रही है।
मंडी में अनियमितताओं के आरोप लगातार
कृषि उपज मंडी शिवपुरी लंबे समय से विभिन्न विवादों को लेकर सुर्खियों में रही है। व्यापारियों का आरोप है कि मंडी बोर्ड के नियमों के अनुसार पर्चियां नहीं काटी जा रही हैं, जबकि मंडी में प्रतिदिन हजारों ट्रॉली प्याज की आवक हो रही है। इससे राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं किसानों ने तोल व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। कुछ समय पहले निर्धारित वजन से अधिक तोल किए जाने के वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें किसानों के साथ कथित अन्याय की बात सामने आई थी।
कलेक्टर की सख्ती मंडी में क्यों नहीं दिख रही?
जिले में अन्य मामलों में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच टीमें गठित की हैं, अधिकारियों को हटाया है और मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया है। लेकिन कृषि उपज मंडी शिवपुरी के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मंडी प्रशासन के खिलाफ सख्ती क्यों नहीं दिखाई जा रही।
मंडी सचिव की जवाबदेही भी तय हो
कृषि उपज मंडी की व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी मंडी सचिव की भी होती है। ऐसे में लगातार सामने आ रही शिकायतों, अवैध वसूली के आरोपों, पर्ची व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और किसानों-व्यापारियों की नाराजगी के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन परिस्थितियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
किसानों और व्यापारियों की मांग
व्यापारियों और किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही मंडी में वर्षों से जमे कर्मचारियों के स्थानांतरण और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
जनता पूछ रही है...
जब शिकायत हो चुकी है, वीडियो सामने आ चुके हैं और जांच के आदेश भी दिए जा चुके हैं, तो आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
क्या मंडी में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी या फिर जांच फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। किसानों और व्यापारियों को इंतजार है कि कलेक्टर की सख्ती मंडी तक कब पहुंचेगी और वर्षों से उठ रहे सवालों का जवाब आखिर कब मिलेगा।




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