शिवपुरी शिक्षा विभाग में कुर्सी संग्राम से मचा बवाल आयुक्त के आदेश पर भारी पड़ा रसूख! नियमों को ताक पर रखकर DEO की कुर्सी पर जमे विवेक श्र...
शिवपुरी शिक्षा विभाग में कुर्सी संग्राम से मचा बवाल
आयुक्त के आदेश पर भारी पड़ा रसूख! नियमों को ताक पर रखकर DEO की कुर्सी पर जमे विवेक श्रीवास्तव, कलेक्टर की भूमिका पर भी उठे सवाल
शिवपुरी | इंडिया आज तक | विशेष रिपोर्ट
मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला इन दिनों शिक्षा विभाग की अंदरूनी लड़ाई, विवादित अधिकारियों और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले में शिक्षा व्यवस्था पहले ही भ्रष्टाचार, लापरवाही और विवादों से बदनाम हो चुकी है, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की कुर्सी को लेकर ऐसा टकराव सामने आया है जिसने शासन-प्रशासन दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल की आयुक्त द्वारा जारी आदेश में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार निगम को जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार सौंपे जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वर्तमान में विवेक श्रीवास्तव कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। बताया जा रहा है कि वे कलेक्टर द्वारा दिए गए पुराने अतिरिक्त प्रभार का हवाला देकर पद पर बने हुए हैं। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर राज्य स्तर के आदेश के बाद भी जिला स्तर पर आदेश लागू क्यों नहीं कराया गया?
क्या शिवपुरी में शासन से बड़ा हो गया “रसूख”...?
शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा है कि आयुक्त स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद यदि प्रभार नहीं बदला जा रहा, तो इसके पीछे आखिर किसका संरक्षण काम कर रहा है? क्या जिला प्रशासन खुद शासन के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहा? शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच यह मामला चर्चा का केंद्र बन चुका है।
संजय श्रीवास्तव विवाद फिर चर्चा में
जिले के शिक्षा विभाग का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारी संजय श्रीवास्तव का कथित ऑडियो विवाद पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा था। उस विवाद के बाद विभाग की काफी किरकिरी हुई थी। अब यह भी चर्चा का विषय है कि वर्तमान DEO विवेक श्रीवास्तव उन्हीं के भाई बताए जा रहे हैं। ऐसे में विपक्षी स्वर यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है?
शिक्षा व्यवस्था बदहाल, रिजल्ट नीचे, जिम्मेदार कौन?
शिवपुरी जिले की शिक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है। सूत्रों के अनुसार, कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अव्यवस्थित निरीक्षण व्यवस्था, कमजोर परीक्षा परिणाम और नियम विरुद्ध संचालन की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं। जिले के कई अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विभाग के अधिकारी शिक्षा सुधार के बजाय कुर्सी बचाने की राजनीति में उलझे हुए हैं।
कलेक्टर, कमिश्नर और सरकार से कार्रवाई की मांग
अब पूरे मामले में जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा, ग्वालियर कमिश्नर, मुख्यमंत्री Mohan Yadav और मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग की भूमिका पर निगाहें टिक गई हैं। जिले के जनप्रतिनिधियों से भी मांग उठ रही है कि शिक्षा विभाग में फैली अनियमितताओं और आदेशों की अवहेलना पर तत्काल जांच कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल…
क्या शिवपुरी में शासन के आदेशों से ऊपर स्थानीय रसूख काम कर रहा है?
आखिर DEO की कुर्सी में ऐसा क्या है जिसे छोड़ने को अधिकारी तैयार नहीं?
क्या शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर कभी बड़ी कार्रवाई होगी?
क्या जिले के विद्यार्थियों का भविष्य इसी तरह अफसरशाही की लड़ाई में दांव पर लगा रहेगा?
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
Mob : 9977708976
दिनांक : 28/05/2026

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