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30-35 साल से एक ही कुर्सी पर जमे अधिकारी-कर्मचारी, क्या यही है भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह? शिवपुरी के कई विभागों में निष्पक्ष जांच और संपत्ति सत्यापन की उठी मांग

  The Padtaal News | Indiaaajtak.in Editor-in-Chief : Vinod Vikat Mob. : 9977708976 दिनांक : 28/07/2026 30-35 साल से एक ही कुर्सी पर जमे अधि...

 The Padtaal News | Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob. : 9977708976

दिनांक : 28/07/2026

30-35 साल से एक ही कुर्सी पर जमे अधिकारी-कर्मचारी, क्या यही है भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह? शिवपुरी के कई विभागों में निष्पक्ष जांच और संपत्ति सत्यापन की उठी मांग











शिवपुरी। शिवपुरी जिले के विभिन्न शासकीय विभागों में वर्षों से एक ही स्थान और एक ही पद पर जमे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार जिले के कई विभागों में अधिकारी और कर्मचारी पिछले 25 से 35 वर्षों से एक ही जिले और एक ही कार्यालय में पदस्थ हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होती है तथा भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

जानकारी के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग में कई बाबू और कर्मचारी पिछले 25 से 30 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत बताए जाते हैं। इसी प्रकार कृषि उपज मंडी में भी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों को लेकर चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार मंडी में कार्यरत एक सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी करीब 25 से 30 वर्षों से शिवपुरी में पदस्थ हैं। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि उनकी सेवा अवधि के दौरान अर्जित चल-अचल संपत्ति का भी आय के अनुपात में परीक्षण कराया जाए।

इसी प्रकार लोक निर्माण विभाग (PWD) भी लंबे समय से चर्चाओं में रहा है। विभाग में पूर्व में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले सामने आ चुके हैं तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस में प्रकरण भी दर्ज हुए थे। ऐसे में नागरिकों का कहना है कि विभाग में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति की भी निष्पक्ष जांच होना चाहिए।

नगर पालिका शिवपुरी में भी पूर्व में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। आरोपों के बाद पुलिस जांच भी हुई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों, इंजीनियरों और संबंधित कर्मचारियों पर उस समय आरोप लगे थे, उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों की भी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

शिक्षा विभाग में भी विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इसी तरह मत्स्य विभाग में भी करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार की चर्चाएं होती रही हैं। नागरिकों का कहना है कि केवल एक-दो विभाग नहीं, बल्कि सभी शासकीय कार्यालयों में व्यापक जांच की आवश्यकता है।

जानकारी के अनुसार आदिम जाति कल्याण विभाग, नापतौल विभाग, सर्व शिक्षा अभियान, खनिज विभाग, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, नगर पंचायत, वन विभाग, जल संसाधन विभाग, आबकारी विभाग, सड़क विभाग, जिला चिकित्सालय तथा पुलिस विभाग सहित अनेक कार्यालयों में भी कई अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ बताए जाते हैं। इसके अलावा सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायकों की लंबे समय से एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से परीक्षण करना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि यह देखा जाए कि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी नौकरी में कब नियुक्त हुए, अब तक उन्हें कितना वेतन और अन्य वैध आय प्राप्त हुई तथा उसके मुकाबले उनके पास कितनी चल-अचल संपत्ति है। यदि संपत्ति वैध आय के अनुरूप है तो जांच से उनकी छवि भी स्पष्ट होगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोगों का यह भी कहना है कि आजादी के बाद वर्ष 1947 से अब तक शिवपुरी जिले में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों ने किन विभागों में लंबे समय तक पदस्थ रहकर कार्य किया, इसका भी प्रशासनिक रिकॉर्ड खंगालने की आवश्यकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन विभागों में वर्षों से स्थानांतरण नीति का प्रभावी पालन नहीं हुआ।

नागरिकों का कहना है कि इस गंभीर विषय पर जिले की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने भी अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई है। उनका मानना है कि शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की समय-समय पर समीक्षा हो तथा आवश्यकतानुसार स्थानांतरण और जांच की कार्रवाई की जाए।

जिले के नागरिकों ने कलेक्टर अर्पित वर्मा से मांग की है कि सभी विभागों में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची तैयार कराकर उनके कार्यकाल, आय के स्रोत तथा चल-अचल संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता बढ़े और आम जनता का विश्वास मजबूत हो।

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