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मंडी में राजस्व चोरी, अवैध वसूली और वर्षों से जमे बाबू पर उठे सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?

  पड़ताल......? मंडी में राजस्व चोरी, अवैध वसूली और वर्षों से जमे बाबू पर उठे सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं? शिवपुरी। कृषि उप...

 पड़ताल......?

मंडी में राजस्व चोरी, अवैध वसूली और वर्षों से जमे बाबू पर उठे सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?


शिवपुरी। कृषि उपज मंडी शिवपुरी एक बार फिर गंभीर आरोपों और अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। मंडी में पिछले लगभग 20 से 25 वर्षों से पदस्थ सहायक ग्रेड-2 एवं स्थापना शाखा से जुड़े कर्मचारी जयसवाल पर वर्षों से विभिन्न प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।


जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के दौरान राजस्व हानि एवं लाइसेंस जारी करने में कथित अनियमितताओं को लेकर पुलिस जांच और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश तक दिए गए थे। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी की भूमिका को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि स्थापना शाखा तक सीमित जिम्मेदारी होने के बावजूद मंडी की अन्य शाखाओं और प्रशासनिक कार्यों में भी उनका प्रभाव बना रहा। इस दौरान मंडी में कई सचिवों का स्थानांतरण हुआ, लेकिन संबंधित कर्मचारी की कार्यशैली और प्रभाव को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं।

इधर हाल ही में कृषि उपज मंडी शिवपुरी में प्याज की आवक से जुड़े लगभग 5 लाख रुपए के राजस्व नुकसान का मामला सामने आया है। किसानों एवं व्यापारियों द्वारा जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसडीएम आनंद राजावत द्वारा तहसीलदार अनिल धाकड़ से जांच कराई गई। जांच में राजस्व हानि की बात सामने आने के बावजूद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने से किसान और व्यापारी वर्ग सवाल उठा रहा है।

मामले को और गंभीर तब माना गया जब कुछ समय पूर्व संबंधित कर्मचारी का एक वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह मंडी के सेफगार्ड संबंधी कार्रवाई के नाम पर एक व्यापारी के प्रतिष्ठान पर पहुंचे दिखाई दिए थे। व्यापारियों ने आरोप लगाया था कि उनसे अवैध रूप से राशि की मांग की जा रही थी। इस मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची और जांच भी प्रारंभ हुई थी।

व्यापारी वर्ग का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित कर्मचारी स्थापना शाखा से जुड़े हैं तो फिर वे किस अधिकार और आदेश के तहत मंडी शुल्क, सेफगार्ड अथवा व्यापारिक निरीक्षण से जुड़े मामलों में सीधे हस्तक्षेप कर रहे थे। मंडी अधिनियम के तहत ऐसे अधिकार किस अधिकारी या कर्मचारी को प्राप्त हैं, यह भी जांच का विषय माना जा रहा है।

दूसरी ओर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से लगातार शिकायतें, जांच और आरोप सामने आने के बावजूद न तो जिम्मेदारी तय हो रही है और न ही दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई दिखाई दे रही है।

इस संबंध में कृषि उपज मंडी सचिव बालेश शुक्ला से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। वहीं एसडीएम एवं भारसाधक अधिकारी आनंद राजावत से भी संपर्क नहीं हो पाया। दोनों अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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