बिना लॉक के रखे स्ट्रक्चर, तेज रफ्तार वाहन टकराया तो बड़ा हादसा तय! पोहरी रोड के रेलवे ओवरब्रिज में निर्माण की शुरुआत से ही उठ रहे सवाल, ठ...
बिना लॉक के रखे स्ट्रक्चर, तेज रफ्तार वाहन टकराया तो बड़ा हादसा तय!
पोहरी रोड के रेलवे ओवरब्रिज में निर्माण की शुरुआत से ही उठ रहे सवाल, ठेकेदार बोला- हमने तो सीमेंट-कंक्रीट की दीवार का सुझाव दिया था
शिवपुरी। पोहरी रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल के साइड में सुरक्षा दीवार के रूप में लगाए जा रहे सीमेंट-कंक्रीट के स्ट्रक्चर को आपस में लॉक नहीं किए जाने से इसकी मजबूती और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि पुल के जिस हिस्से में यह व्यवस्था की जा रही है, वहां आगे मोड़ भी है। ऐसे में रात के समय तेज रफ्तार वाहन चालक से जरा सी चूक हुई तो दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
मौके पर दिखाई दे रही निर्माण व्यवस्था के अनुसार साइड में सीमेंट-कंक्रीट के अलग-अलग स्ट्रक्चर रखे गए हैं। इन्हें दूसरे स्ट्रक्चर के साथ इस तरह लॉक करने की व्यवस्था नजर नहीं आती, जैसी कई अन्य पुलों में दिखाई देती है। सवाल यह है कि यदि कोई तेज रफ्तार वाहन इन स्ट्रक्चरों से टकराता है तो क्या वे अपनी जगह पर मजबूती से टिके रहेंगे? यदि स्ट्रक्चर टूटकर या उखड़कर नीचे सर्विस रोड पर गिरते हैं तो वहां से गुजरने वाले वाहन और लोगों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
ठेकेदार ने कहा- हमने पक्की दीवार का सुझाव दिया था
इस संबंध में ठेकेदार एसएस गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि लगाए जा रहे स्ट्रक्चर छोटे आकार के हैं और कम ऊंचाई वाले पुलों में इस्तेमाल किए जाते हैं। बड़े पुलों में आपस में फंसकर लॉक होने वाले स्ट्रक्चर लगाए जाते हैं। तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से इनके उखड़ने की आशंका पर उन्होंने कहा कि स्ट्रक्चर आपस में मजबूती से जुड़े रहते हैं।
ठेकेदार ने यह भी बताया कि उनकी ओर से सीमेंट-कंक्रीट की दीवार बनाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली।
मोड़ भी बना सकता है परेशानी
पुल के निर्माण में जिस स्थान पर यह साइड स्ट्रक्चर लगाए जा रहे हैं, वहां सड़क का मोड़ भी है। दिन के समय तो चालक आसानी से मोड़ को देख सकता है, लेकिन रात में तेज रफ्तार वाहन चालक के लिए स्थिति अलग हो सकती है। यदि वाहन अनियंत्रित होकर साइड स्ट्रक्चर से टकराता है तो सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती महत्वपूर्ण हो जाती है।
यही वजह है कि निर्माणाधीन पुल की डिजाइन, सुरक्षा मानकों और लगाए जा रहे स्ट्रक्चर की मजबूती की तकनीकी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
पहले भी निर्माण के दौरान सामने आ चुका है सवाल
पोहरी रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने के बाद यह पहला मौका नहीं है जब काम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हों। वर्ष 2025 में निर्माण के दौरान पुल का एक स्लैब गिरने की घटना की रिपोर्ट सामने आई थी। उस घटना में मजदूरों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई थी।
अब साइड सुरक्षा स्ट्रक्चर को लेकर उठ रहे सवालों ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है।
शहर में तेज रफ्तार वाहनों से पहले भी हो चुके हैं हादसे
शिवपुरी में तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क किनारे लगे ढांचे और डिवाइडर क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कलेक्ट्रेट के पास लायंस चौक और राजेश्वरी रोड सहित शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज रफ्तार वाहनों के कारण नुकसान हुआ है। ऐसे में पुल जैसे बड़े और ऊंचे निर्माण पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
करोड़ों के निर्माण में निगरानी पर उठे सवाल
पोहरी रोड रेलवे ओवरब्रिज शहर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। वर्ष 2024 की रिपोर्टों में इसकी लंबाई करीब 750 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर तथा लागत करीब 34 करोड़ रुपये बताई गई थी। सितंबर 2026 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी निर्माणाधीन पोहरी रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण कर अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली थी।
ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा की नियमित तकनीकी निगरानी कौन कर रहा है? क्या लगाए जा रहे साइड स्ट्रक्चर स्वीकृत ड्राइंग और तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं? क्या किसी तकनीकी अधिकारी ने यह जांच की है कि तेज रफ्तार वाहन की टक्कर की स्थिति में ये स्ट्रक्चर किस तरह प्रतिक्रिया करेंगे?
जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी को मौके का तकनीकी निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि पुल तैयार होने के बाद किसी हादसे का इंतजार न करना पड़े।






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