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डिजिटल नशे की गिरफ्त में युवा , दिनभर ट्रांस म्यूजिक में खोए रहते हैं बच्चे

  डिजिटल नशे की गिरफ्त में युवा , दिनभर ट्रांस म्यूजिक में खोए रहते हैं बच्चे बेचैन 👁️नजर  शिवपुरी /नशे की लत के कई मामले सामने आते रहे हैं...

 डिजिटल नशे की गिरफ्त में युवा , दिनभर ट्रांस म्यूजिक में खोए रहते हैं बच्चे

बेचैन 👁️नजर 


शिवपुरी /नशे की लत के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन अब समाज के सामने एक नई और खतरनाक चुनौती खड़ी हो गई है—डिजिटल नशा। इस नशे पर न तो पुलिस का कोई बस चलता है और न ही खुफिया एजेंसियों की पकड़ है। इंटरनेट पर डिजिटल ड्रग्स के नाम से सर्च करते ही कई ट्रैक सामने आ जाते हैं, जिनकी धुन पर बच्चे और युवा तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

डिजिटल ड्रग्स दरअसल बिना बोल वाले ट्रांस म्यूजिक ट्रैक होते हैं। इन्हें सुनने पर दिमाग पर नशे जैसा असर होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ये ट्रैक मस्तिष्क की तरंगों को प्रभावित करते हैं और युवाओं में मानसिक लत पैदा कर देते हैं। खासतौर पर 15 से 25 साल की उम्र के बच्चे और युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।

स्थिति यह है कि युवा दिनभर में 8 से 10 घंटे तक हेडफोन लगाकर इन धुनों में खोए रहते हैं। इसका असर उनकी दिनचर्या पर पड़ रहा है। घर के कामकाज, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार सब प्रभावित हो रहे हैं। माता-पिता की बात सुनना तो दूर, कई युवा घरवालों से बातचीत तक करना छोड़ देते हैं।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह नशा धीरे-धीरे युवा पीढ़ी को समाज से काट रहा है। परिवारों में तनाव बढ़ रहा है और शिक्षा पर सीधा असर दिख रहा है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क रहने और बच्चों पर ध्यान देने की सलाह दी है। डिजिटल नशे से निपटने के लिए सामूहिक जागरूकता और कड़े सामाजिक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।

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