शिवपुरी नगर पालिका में घोटाला उजागर: सीएमओ ईशांक धाकड़ सहित पूर्व अफसरों पर भी गिरी गाज > शिवपुरी नगरपालिका की अनियमितताओं पर बड़ी कार...
शिवपुरी नगर पालिका में घोटाला उजागर: सीएमओ ईशांक धाकड़ सहित पूर्व अफसरों पर भी गिरी गाज
> शिवपुरी नगरपालिका की अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई/ बेचैन👁️ नजर
शिवपुरी । नगरपालिका परिषद शिवपुरी में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं और वित्तीय कदाचार के मामलों पर अब शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई हुई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, भोपाल ने आदेश जारी कर तत्कालीन और वर्तमान तीन मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (सीएमओ) को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें वर्तमान सीएमओ ईशांक धाकड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि पूर्व सीएमओ केशव सिंह सगर और शैलेष अवस्थी के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
कलेक्टर शिवपुरी द्वारा संचालनालय को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2022 से अब तक नगर पालिका शिवपुरी में कुल 743 निर्माण कार्य, जिनकी लागत 57.80 करोड़ रुपये है, या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए। कई कार्य निविदा प्रक्रिया के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं। वहीं कुछ पूर्ण कार्यों का भुगतान ठेकेदारों को 4 से 8 माह तक रोका गया, जबकि कुछ को 1–2 माह में ही करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि 11.47 करोड़ रुपये के भुगतान में से 5.09 करोड़ केवल दो फर्मों को दिए गए, जिससे अन्य ठेकेदार लगातार शिकायतें करते रहे।
रिपोर्ट में कहा गया कि नगर पालिका कार्यालय में पारदर्शिता और अनुशासन का अभाव है। कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं आते और न ही अपनी कुर्सियों पर बैठते हैं। फाइलों की आवाजाही का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता और कई फाइलें अध्यक्ष के घर पर पाई जाती हैं। पार्षदों ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
परिषद और पीआईसी की बैठकों में बजट प्रावधान और नगरपालिका की वित्तीय स्थिति को दरकिनार कर करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पारित किए गए। निर्माण कार्यों के भुगतान में भी वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं किया गया। कुछ कार्यों का भुगतान तीन माह में कर दिया गया, जबकि कुछ का तीसरे साल तक भी नहीं हुआ।
कैशबुक की जांच में पाया गया कि एक ही फर्म को बार-बार एक लाख से कम की राशि में भुगतान किया गया। इससे ई-टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी हुई और संस्था को आर्थिक हानि पहुंचने की आशंका जताई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, नामांतरण के 520 प्रकरण लंबित पाए गए, जिनमें से 290 महीनों से एजेंडे में शामिल न होने के कारण अटके रहे। इसी प्रकार, भवन निर्माण स्वीकृति के 55 प्रकरण भी समयसीमा से बाहर लंबित थे। इनमें से कई प्रकरण बिना कारण अधिकारी स्तर पर रोके गए।
वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 तक की कैशबुक अधूरी पाई गई। इसमें प्राप्तियों और बैलेंस का उल्लेख नहीं था और न ही राशि का उपयोग स्पष्ट था। साथ ही, परिषद बैठकों का प्रोसीडिंग रजिस्टर भी अध्यक्ष के निवास पर भेजे जाने की बात सामने आई।
करीब 45 निर्माण कार्यों की फाइलें भी उपलब्ध नहीं मिलीं, जिसका कोई संतोषजनक जवाब सीएमओ की ओर से नहीं दिया गया।
कलेक्टर शिवपुरी ने अपनी अनुशंसा में कहा कि अगस्त 2022 से अब तक पदस्थ रहे तीनों सीएमओ शैलेष अवस्थी, केशव सिंह सगर और वर्तमान सीएमओ ईशांक धाकड़ ने अव्यवस्था सुधारने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए। इससे निकाय में अराजकता और अविश्वास का माहौल बना रहा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नगरपालिका कर्मचारियों में सेवा भावना का अभाव है और वे अपने कार्यों के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
उपलब्ध अभिलेखों और कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर नगरीय प्रशासन विभाग ने माना कि वर्तमान सीएमओ ईशांक धाकड़ की कार्यप्रणाली घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और शासन के प्रति निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
आदेशानुसार, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर ग्वालियर संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय में मुख्यालय भेजा गया है। निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर साफ करता है कि शिवपुरी नगरपालिका में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और लापरवाही की जड़ें गहरी हैं। शासन की इस कार्रवाई से जहां कर्मचारियों और अधिकारियों में खलबली मच गई है, वहीं नागरिक अब उम्मीद जता रहे हैं कि नगर पालिका की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और शहर की विकास योजनाएं पटरी पर लौटेंगी।

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