Indiaaajtak.in अफसरनामा Editor-in-Chief : Vinod Vikat मो. 09977708976 दिनांक : 08 जून 2026 नो-एंट्री का मजाक उड़ाते कंटेनर-ट्रक, आखिर किसक...
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अफसरनामा
Editor-in-Chief : Vinod Vikat
मो. 09977708976
दिनांक : 08 जून 2026
नो-एंट्री का मजाक उड़ाते कंटेनर-ट्रक, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा मौत का यह खेल?
यातायात प्रभारी की नाक के नीचे शहर में घुस रहे भारी वाहन, हादसा होने के बाद ही जागेगा प्रशासन?
शिवपुरी। शहर की यातायात व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे चलती दिखाई दे रही है। कागजों में नो-एंट्री लागू है, चौराहों पर नियमों के बोर्ड लगे हैं, अधिकारियों के बयान भी आ रहे हैं, लेकिन सड़कों पर हकीकत बिल्कुल अलग है। कंटेनर, ट्रक और रेत से भरे डंपर दिनदहाड़े शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है तो आखिर ये वाहन शहर के बीचोंबीच तक पहुंच कैसे रहे हैं? क्या यातायात विभाग को यह दिखाई नहीं देता, या फिर नियमों की खुलेआम अवहेलना पर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
शनिवार को स्थिति तब और शर्मनाक हो गई जब एक विशाल कंटेनर विधायक देवेंद्र जैन के निवास के समीप थीम रोड पर सड़क के बीचोंबीच खड़ा मिला। चालक वाहन छोड़कर गायब हो गया और आम नागरिक आधे घंटे तक जाम और अव्यवस्था झेलते रहे। यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे यातायात तंत्र की विफलता का जीवंत उदाहरण है।
नो-एंट्री के नाम पर दिखावा, जमीन पर शून्य अमल
गुना और ग्वालियर नाकों पर हाईट लिमिट पोल लगाकर प्रशासन अपनी पीठ थपथपा सकता है, लेकिन आईटीआई क्षेत्र से रोजाना भारी वाहनों का शहर में प्रवेश इस व्यवस्था की पोल खोल रहा है। तीन वर्ष पहले बनाया गया हाईट लिमिट स्ट्रक्चर आज भी बिना पोल के खड़ा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा कौन-सा दबाव है जिसके आगे प्रशासन और यातायात विभाग वर्षों से घुटने टेकता आ रहा है?
यदि एक साधारण नागरिक नियम तोड़े तो तत्काल चालान हो जाता है, लेकिन कई टन वजनी कंटेनर और ट्रक शहर में घुस जाएं तो जिम्मेदार अधिकारी केवल पत्र लिखने और फोर्स की कमी का बहाना बनाने लगते हैं।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
शहर के लोगों को आज भी वे दर्दनाक हादसे याद हैं, जब भारी वाहनों ने राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को कुचल दिया था। कई परिवार उजड़ गए, कई घरों के चिराग बुझ गए। इसके बावजूद यदि भारी वाहनों की आवाजाही नहीं रुक रही है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता है।
हर दिन हजारों छात्र, महिलाएं, बुजुर्ग और कर्मचारी इन्हीं मार्गों से गुजरते हैं। ऐसे में यदि कोई कंटेनर या डंपर अनियंत्रित हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या फिर वही जांच, मुआवजा और कार्रवाई के आश्वासन का पुराना खेल खेला जाएगा?
सवालों के घेरे में यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव
यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव का कहना है कि आईटीआई क्षेत्र में उनका प्वाइंट नहीं है और फोर्स मिलने के बाद व्यवस्था बनाई जाएगी। लेकिन यह तर्क कई सवाल खड़े करता है। जब समस्या वर्षों पुरानी है तो अब तक उसका समाधान क्यों नहीं हुआ? यदि रोजाना भारी वाहन शहर में प्रवेश कर रहे हैं तो क्या इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं भेजी गई? और यदि भेजी गई तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता यह जानना चाहती है कि आखिर यातायात व्यवस्था चल रही है या केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है?
जिम्मेदार कौन?
नगरपालिका अध्यक्ष स्वयं स्वीकार कर रही हैं कि कलेक्टर की अनुमति मिलते ही दो दिन में हाईट लिमिट पोल लगाया जा सकता है। यदि समाधान इतना आसान है तो वर्षों से इसे रोका किसने? किसके दबाव में शहर की सुरक्षा से समझौता किया गया? और आखिर किसे लाभ पहुंचाने के लिए नो-एंट्री को मजाक बनाकर रखा गया है?
कलेक्टर और एसपी से सीधा सवाल
जब शहर में प्रतिबंधित भारी वाहन खुलेआम घूम रहे हैं, जब सड़कों पर मौत का खतरा मंडरा रहा है, जब यातायात विभाग व्यवस्था संभालने में असफल दिखाई दे रहा है, तब जिला प्रशासन और पुलिस नेतृत्व की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ जाती है।
शिवपुरी की जनता जानना चाहती है कि नो-एंट्री का नियम केवल आम लोगों के लिए है या फिर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और भारी वाहन मालिकों के लिए अलग कानून लागू है?
जब तक आईटीआई पर हाईट लिमिट पोल नहीं लगता, जब तक नो-एंट्री तोड़ने वाले वाहनों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती और जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक शहर की सड़कों पर दौड़ते ये कंटेनर और ट्रक केवल वाहन नहीं, बल्कि संभावित मौत बनकर घूमते रहेंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर किसी अगले बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।



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