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मंडी के चुनाव न होने से लूट का अड्डा बनी अनाज मंडी पिपरसमा, व्यापारी व सचिव आमने- सामने

  मंडी के चुनाव न होने से लूट का अड्डा बनी अनाज मंडी पिपरसमा, व्यापारी व सचिव आमने- सामने बरसों से मंडी में जमे क्लर्क जायसवाल एवं कर्मचारी ...

 मंडी के चुनाव न होने से लूट का अड्डा बनी अनाज मंडी पिपरसमा, व्यापारी व सचिव आमने- सामने

बरसों से मंडी में जमे क्लर्क जायसवाल एवं कर्मचारी पर अवैध वसूली का आरोप, मंडी सचिव ने शिकायत करने वालों को बताया दोषी


शिवपुरी। मध्यप्रदेश की मंडियों में पिछले 14 वर्षों से मंडी अध्यक्ष का चुनाव न होने से मंडी अब लूट खसोट का अड्डा बन गईं। ऐसा ही एक मामला शिवपुरी की पिपरसमा कृषि उपज मंडी का मामला सामने आया। जिसमें व्यापारी एवं मंडी सचिव आमने सामने आ गए। 

फट्टे पर किसानों का माल खरीदने वाले व्यापारी शिवकुमार गुप्ता एवं सचिन गुप्ता ने कलेक्टर को एक शिकायत की है, जिसमें उन्होंने मंडी में बरसों से जमे क्लर्क (अघोषित मंडी प्रभारी) श्रीमान जायसवाल एवं दीपक पर अवैध रूप से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। व्यापारियों का कहना है कि हमने एक बार रुपए दे दिए, लेकिन वो फिर से जब रुपए मांगने आए तो हमने रुपए देने से इंकार कर दिया। जिसके चलते मंडी के कर्मचारियों ने उनके तौल कांटे जब्त कर लिए। 

मंडी की पोल खुलते ही अपने स्टाफ को बचाने मंडी सचिव बबलेश शुक्ला ने आगे आकर देहात थाने में उक्त दोनों व्यापारियों शिवकुमार एवं सचिन के खिलाफ शिकायत की है कि यह लोग अवैधानिक रूप से किसान का माल खरीदते हैं। इतना ही नहीं उनकी दुकान पर 12 क्विंटल गेहूं का अवैध भंडारण भी पकड़ना बताया। 

मंडी सचिव बनने की लग रही बोली

शिवपुरी जिले में कृषि उपज मंडिया लूट खसोट का अड्डा बन गई हैं। जिसके चलते अब मंडी सचिव बनने के लिए सीधे बोली लगाई जा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मंडी सचिव बनाने के लिए खर्च होने वाली राशि भी मंडी के कर्मचारी ही देने को तैयार हैं, क्योंकि उनका सचिव आएगा, तो उन्हें शासन की गुल्लक को चपत लगाने एवं अवैध कमाई की खुली छूट रहेगी।

अध्यक्ष होने से रहता था दवाब

वर्ष 2013 में आखिरी बार मंडी अध्यक्ष के चुनाव हुए थे। जब अध्यक्ष व अन्य सदस्य हुआ करते थे तो मंडी में ऐसी लूटपाट नहीं हो पाती थी, क्योंकि अध्यक्ष व सदस्य भी किसान हुआ करते थे, जो किसानों और व्यापारियों के हित की लड़ाई लड़ते थे। अब तो स्थिति इतनी खराब हो गई कि शासन के राजस्व को खुलेआम चूना लगाकर अपनी जेब भरने की होड़ मची हुई है।

इस खबर में एक अपडेट श्रीमान जायसवाल ने बताई कि मंडी के गेट के सामने ही फट्टे वाले बैठकर मंडी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, और मंडी प्रबंधन मूक बना क्यों बैठा है? वो बोले कि  बाहर फसल खरीदने के विरोध में हमाअलों ने मंडी बंद कर दी थी, तब हमने कार्यवाही की थी। इसका मतलब है कि मंडी नियमों का पालन करवाने के लिए हम्मालों की हड़ताल करनी पड़ रही है,  तब कहीं जाकर मंडी के कर्मचारी कार्यवाही कर रहे हैं।

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