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शिवपुरी के जगलो की अगर NGT के द्वारा जांच की गई तो पूर्व रेंजरों से लेकर वर्तमान DFO तक की कुसी खतरे में है

  शिवपुरी के जगलो की अगर NGT के द्वारा जांच की गई तो पूर्व रेंजरों से लेकर वर्तमान DFO तक की कुसी खतरे में है भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व...

 शिवपुरी के जगलो की अगर NGT के द्वारा जांच की गई तो पूर्व रेंजरों से लेकर वर्तमान DFO तक की कुसी खतरे में है

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे वनपाल को ही सौंपा डिप्टी रेंजर का प्रभार; जांच के नाम पर रची गई बड़ी साजिश

ब्रजेश राय के 'किले' में फल-फूल रहा माफिया


शिवपुरी | मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के वन विभाग में एक तरफ जंगलों को लूटा जा रहा है, तो दूसरी तरफ विभाग के विवादित कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है। ताजा मामला वनपाल ब्रजेश राय का है, जिन पर खुद भ्रष्टाचार और माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद, विभाग के आला अधिकारियों ने उन्हें डिप्टी रेंजर का अतिरिक्त प्रभार सौंपकर भ्रष्टाचार के नेटवर्क को और मजबूती देने का काम किया है।

साजिश के तहत हटवाए पुराने कर्मचारी•••?

सूत्रों का दावा है कि वनपाल ब्रजेश राय लंबे समय से शिवपुरी जिले में ही जमे हुए हैं। आरोप है कि उन्होंने राजनीतिक दबाव और सुनियोजित शिकायतों का सहारा लेकर पूर्व डिप्टी रेंजर बाली राम अहिरवार और बीट गार्ड राम अवतार को निलंबित करवाया। मकसद केवल एक था—इस पूरे क्षेत्र की कमान अपने हाथ में लेना ताकि खैर की लकड़ी की कटाई और अवैध उत्खनन के कारोबार को निर्बाध रूप से चलाया जा सके।

ब्रजेश राय के 'किले' में फल-फूल रहा माफिया

वर्तमान में जिन क्षेत्रों की कमान ब्रजेश राय के पास है (छपरउ, कुंड खोय और अब बीरा-वैरघाट का प्रभार), वहां की स्थिति अब भी चौंकाने वाली है सूत्र बताते है की छपरउ और कुंड खोय बीट में सरेआम पत्थर और फर्सी का अवैध खनन किया जा रहा है।बीरा और वैरघाट बीट में करीब 2000 खैर के पेड़ों का नामोनिशान पहले से ही मिट चुका है, आगे ना कटे इसकी जिम्मेदारी अब राय को दी गई है। राय के प्रभार वाले क्षेत्रों में सैंकड़ों हेक्टेयर वन भूमि पर भू-माफिया का कब्जा है, जिसे हटाने में इन्होंने कभी रुचि नहीं दिखाई।

जब सिंधिया ने लिखी चिट्ठी, तब भी बच निकले राय

हैरानी की बात यह है कि अगस्त 2024 और फरवरी 2026 में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्वयं पर्यावरण मंत्री और DFO को पत्र लिखकर 2000 बीघा जमीन पर अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया था। और निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन विभाग के भीतर ब्रजेश राय जैसे कर्मचारियों का रसूख इतना है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले से ब्रजेश राय जैसे अन्य कई कर्मचारियों सहित बड़े बड़े बड़े अधिकारी भी बच निकले है और कमजोर दो कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़ कर फाइल' बंद कर दी है ईनाम में राय को दंड देने के बजाय पदोन्नति जैसा प्रभार दे दिया।

बीट पर ड्यूटी नहीं, केवल 'कलेक्शन' का खेल!

स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में ब्रजेश राय की भूमिका एक 'मैनेजर' की तरह है। बीट गार्डों की अनुपस्थिति और रात में होने वाली अवैध गतिविधियों को राय का मूक समर्थन प्राप्त है। पूर्व करैरा SDO और रेंजरों के कार्यकाल से जमे राय ने पूरे तंत्र को इस तरह मैनेज किया है कि जांच की आंच उन तक कभी नहीं पहुँचती।

NGT की जांच ही खोलेगी पोल

वन विभाग के इस 'चहेते' वनपाल के कार्यकाल की यदि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से जांच कराई जाए, तो न केवल करोड़ों का वन घोटाला सामने आएगा, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि कैसे एक छोटा कर्मचारी सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचा रहा है। इसके पूरे बैंक अकाउंट और इसके कार्यकाल की अगर जाँच की जाएगी तो वन विभाग का एक बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार सामने निकल कर आएगा। अब सवाल यह है कि “क्या शिवपुरी वन विभाग के पास ईमानदार अधिकारियों की कमी है, जो बार-बार विवादित और दागी छवि वाले 'ब्रजेश राय' जैसे कर्मचारियों को ही मुख्य कमान सौंपी जा रही है••? 

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