7 साल बाद भी लोकायुक्त का चालान पेश नहीं! आखिर किसके संरक्षण में दबा पड़ा है सुधीर मिश्रा रिश्वत कांड? India Aaj Tak.com Editor-in-Chief: व...
7 साल बाद भी लोकायुक्त का चालान पेश नहीं!
आखिर किसके संरक्षण में दबा पड़ा है सुधीर मिश्रा रिश्वत कांड?
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief: विनोद विकट | मोब.: 9977708976 | दिनांक: 28/05/2026
शिवपुरी / शिवपुरी जिले में एक बार फिर वह पुराना रिश्वत कांड सुर्खियों में है जिसने वर्ष 2019 में पूरे प्रशासनिक अमले को हिला दिया था। पिचौर नगर परिषद के तत्कालीन CMO सुधीर मिश्रा को 1 लाख 17 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने रंगेहाथ पकड़ा था। होटल में हुई ट्रैप कार्रवाई की तस्वीरें प्रदेशभर में वायरल हुई थीं, नोटों की गड्डियां कैमरे में कैद हुई थीं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था।
लेकिन अब सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल सामने आ रहा है —
इतने चर्चित मामले में आज तक न्यायालय में चालान पेश क्यों नहीं हुआ?
क्या सिर्फ दिखावे की कार्रवाई थी?
जनता पूछ रही है कि जब लोकायुक्त ने खुद ट्रैप किया, रकम बरामद की, पंचनामा बनाया और मामला दर्ज किया, तो फिर सात साल बाद भी केस अंतिम मोड़ तक क्यों नहीं पहुंच पाया?
क्या जांच अधूरी है?
क्या फाइल दबा दी गई?
क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के कारण कार्रवाई ठंडी पड़ गई?
या फिर भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियां केवल सुर्खियां बनाने तक सीमित हैं?
यह सवाल अब शिवपुरी से लेकर भोपाल तक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
कुर्सी भी बची, सिस्टम भी चुप!
सबसे हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि लोकायुक्त ट्रैप के बाद भी सुधीर मिश्रा सरकारी व्यवस्था में सक्रिय बने हुए हैं। नगर पालिका शिवपुरी में राजस्व निरीक्षक (RI) और सहायक चार्ज अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर उनकी मौजूदगी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक अधिकारी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन और न्यायालयीन प्रक्रिया में इतनी देरी आखिर क्यों?
लोकायुक्त संगठन पर उठे गंभीर सवाल
अब खुद लोकायुक्त संगठन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी यदि अपने ही चर्चित मामलों में वर्षों तक चालान पेश नहीं कर पाती, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
कानूनी जानकारों का कहना है कि ट्रैप मामलों में सामान्यतः जांच के बाद चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है, ताकि सुनवाई आगे बढ़ सके। लेकिन यदि वर्षों तक मामला लंबित रहे, तो इससे पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन विभाग से जवाब की मांग
अब जनता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन विभाग, लोकायुक्त संगठन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांग रही है कि —
आखिर सुधीर मिश्रा मामले में चालान क्यों पेश नहीं हुआ?
क्या विभागीय जांच पूरी हुई?
क्या आरोपी अधिकारी को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है?
और यदि नहीं, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों?
जनता में बढ़ रहा आक्रोश
शिवपुरी और पिचौर क्षेत्र में लोगों के बीच यह मामला फिर गर्माने लगा है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में लोग खुलकर कह रहे हैं कि यदि रिश्वत लेते पकड़े गए मामलों में भी कार्रवाई वर्षों तक अधर में रहेगी, तो भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगेगी?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकायुक्त संगठन और शासन इस मामले में कोई नया कदम उठाते हैं या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

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