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“दल बदल से सत्ता तक… अब क्या प्रशासन पर पकड़ बना पाएंगे विधायक कैलाश कुशवाह?”
रिपोर्ट: विनोद विकट
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
Mob: 9977708976
दिनांक: 27/05/2026
शिवपुरी जिले की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नेता की हो रही है, तो वह हैं कैलाश कुशवाहा।
पोहरी विधानसभा क्षेत्र 24 से वर्तमान विधायक बने कैलाश कुशवाहा का राजनीतिक सफर अब जिले की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बनता जा रहा है।
कभी कमल के फूल और राजमाता राजनीति के मजबूत चेहरे यशोधरा राजे सिंधिया के करीबी माने जाने वाले कैलाश कुशवाहा ने समय के साथ अपनी राजनीति की दिशा बदली। पहले भाजपा की विचारधारा के साथ दिखाई दिए, फिर बहुजन समाज पार्टी से हाथी के चुनाव चिन्ह पर दो बार चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन जनता ने उन्हें जीत का ताज नहीं पहनाया।
इसके बाद राजनीति ने ऐसा करवट ली कि वही कैलाश कुशवाहा कांग्रेस की चौखट पर पहुंचे और कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी और जीतू पटवारी की टीम के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी खेलने लगे।
राजनीति के इस लंबे उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार पोहरी की जनता ने उन्हें पहली बार विधायक बनाकर विधानसभा पहुंचा दिया।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—
क्या विधायक बनने के बाद भी कैलाश कुशवाहा पूरे सिस्टम पर पकड़ बना पाए हैं…?
सूत्रों के अनुसार पोहरी विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, आबकारी विभाग, खाद्य विभाग, पीडब्ल्यूडी, पुलिस प्रशासन, पटवारी-तहसीलदार व्यवस्था से लेकर कृषि उपज मंडी तक कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधायक के निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। कई विभागों के अधिकारी अपनी अलग कार्यशैली में काम कर रहे हैं, जिससे यह संदेश जा रहा है कि प्रशासनिक व्यवस्था विधायक के नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चर्चा अब शिवपुरी शहर में हो रही है।
सूत्र बताते हैं कि कैलाश कुशवाहा अब केवल पोहरी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि उनकी नजर भविष्य में शिवपुरी विधानसभा की राजनीति पर भी टिक चुकी है। शिवपुरी में उनका लगातार बढ़ता राजनीतिक संपर्क, सक्रियता और निवास को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कैलाश कुशवाहा शिवपुरी सीट की तरफ बढ़ते हैं, तो जिले की राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है। क्योंकि शिवपुरी की राजनीति पहले से ही कई बड़े नेताओं, गुटों और शक्ति केंद्रों के बीच बंटी हुई मानी जाती है।
अब बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि—
क्या कांग्रेस नेतृत्व भविष्य में कैलाश कुशवाहा को शिवपुरी से मौका देगा…?
क्या भाजपा उनके बढ़ते प्रभाव को चुनौती मान रही है…?
क्या प्रशासनिक अधिकारी विधायक की राजनीतिक शक्ति को गंभीरता से ले रहे हैं…?
इन तमाम सवालों के बीच जिले की राजनीति गर्म है और भोपाल तक चर्चाओं का बाजार तेज हो चुका है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में पोहरी और शिवपुरी की राजनीति में कई बड़े समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधायक कैलाश कुशवाहा केवल राजनीतिक दल बदल की पहचान बनकर रह जाएंगे या वास्तव में प्रशासनिक पकड़ और विकास कार्यों के जरिए अपनी मजबूत राजनीतिक छवि स्थापित कर पाएंगे।




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