Page Nav

HIDE

Breaking News:

latest

Total Pageviews

मध्यप्रदेश परिवहन विभाग पर सबसे बड़ा सवाल!

  Writing 🚨 मध्यप्रदेश परिवहन विभाग पर सबसे बड़ा सवाल! 🚨 “क्या पूरा विभाग बन गया था वसूली का अड्डा…?” “सौरभ शर्मा कांड के बाद परिवहन विभाग...

 Writing

🚨 मध्यप्रदेश परिवहन विभाग पर सबसे बड़ा सवाल! 🚨

“क्या पूरा विभाग बन गया था वसूली का अड्डा…?”

“सौरभ शर्मा कांड के बाद परिवहन विभाग में भूचाल… मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतें!”

India aaj tak.com

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob : 9977708976

Date : 28/05/2026



ग्वालियर / मध्यप्रदेश परिवहन विभाग इस समय अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। विभाग का एक साधारण आरक्षक सौरभ शर्मा जब कथित रूप से करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, तो पूरे विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई। अब सवाल केवल एक कर्मचारी पर नहीं, बल्कि पूरे परिवहन विभाग की व्यवस्था पर उठ रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि प्रदेश के कई परिवहन चेकपोस्ट वर्षों से कथित अवैध वसूली के केंद्र बने हुए थे। बंद घोषित किए गए चेकपोस्टों पर भी कर्मचारियों की तैनाती और लगातार तबादले होते रहे। अब यही मामला पूरे विभाग के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।

परिवहन विभाग में पहले डीपी गुप्ता परिवहन आयुक्त रहे, उसके बाद एडीजी विवेक शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई और फिर उमेश जोगा परिवहन आयुक्त बने। लेकिन विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और संवेदनशील चेकपोस्टों पर जमे नेटवर्क को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती रहीं।

विभागीय दस्तावेजों और वायरल सूचियों में राहुल गौतम, मुकेश जैन, शेख निजामुद्दीन, मनीष सालवीय, कोमल सिंह, राजेश आलोरिया, राजेश कुमार कुमरे, बालाजी गुर्जर, बबीता डोडवा, रामकृष्ण पाटीदार, महेंद्र कुमार जरिया, कुलदीप गुप्ता, विकास पटेल, अनिल प्रताप सिंह चौहान, पियूष मंडलोई, सुनील कुमार साहू, भूपेंद्र सिंह तोमर, जितेंद्र सिंह सुमन, मुकेश सिंह, विवेक डोले, लवेश कटारे, प्रेम सिंह मुनिया, केशव यादव, अनार सिंह, कुलदीप सिंह, निरंजन सिंह चौहान, सौरभ व्यास, मनोज त्यागी, संतोष नरवरिया और चन्द्रभूषण गौतम जैसे कई नामों की चर्चा पूरे विभाग में जोरों पर है।

सूत्र बताते हैं कि खवासा, मलैथोन, नयागांव, चाकघाट, खिलचीपुर, पिटोल, सीकरा, सोहागपुर फाटा, मोरवा, रनियाज तिगेला, पहाड़ीघाट और खरईघोरा जैसे चेकपोस्ट लंबे समय से विवादों में रहे हैं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि यहां से कथित रूप से रोजाना लाखों रुपये की वसूली होती थी और इसका नेटवर्क नीचे से ऊपर तक फैला हुआ था।

सबसे बड़ा सवाल अब मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के सामने खड़ा हो गया है कि आखिर इतने वर्षों तक पूरा सिस्टम कैसे चलता रहा? यदि चेकपोस्ट बंद थे तो वहां कर्मचारियों की पोस्टिंग क्यों जारी रही? आखिर किसके संरक्षण में यह सब होता रहा?

सूत्रों के अनुसार अब विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी अंदरखाने घबराए हुए हैं। पुराने आदेश, तबादला सूची और पोस्टिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। भोपाल से ग्वालियर, इंदौर से रीवा और सागर से जबलपुर तक परिवहन विभाग में भारी बेचैनी का माहौल बताया जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस पूरे मामले को लेकर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर हमलावर होने की तैयारी में है, जबकि सामाजिक संगठनों ने पूरे परिवहन विभाग की हाईलेवल जांच की मांग कर दी है।

अब पूरे प्रदेश में एक ही चर्चा है —

क्या परिवहन विभाग में वर्षों से करोड़ों का खेल चल रहा था…?

क्या सौरभ शर्मा सिर्फ एक चेहरा था…?

क्या अब बड़े अधिकारियों और पूरे नेटवर्क पर गिरेगी गाज…?

और क्या मुख्यमंत्री पूरे विभाग में सबसे बड़ा एक्शन लेने वाले हैं…?

इन सवालों ने पूरे मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में ऐसी सनसनी फैला दी है कि अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक हर कोई दहशत में बताया जा रहा है।

No comments

Contact Form

Name

Email *

Message *

Latest Articles