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शिक्षा विभाग में ‘कुर्सी युद्ध’ से बिगड़ी व्यवस्था, अब सख्त सुधार की जरूरत

  शिक्षा विभाग में ‘कुर्सी युद्ध’ से बिगड़ी व्यवस्था, अब सख्त सुधार की जरूरत आदेशों की अनदेखी, विवादित अफसरों की वापसी और गिरती शिक्षा गुणवत...

 शिक्षा विभाग में ‘कुर्सी युद्ध’ से बिगड़ी व्यवस्था, अब सख्त सुधार की जरूरत

आदेशों की अनदेखी, विवादित अफसरों की वापसी और गिरती शिक्षा गुणवत्ता ने बढ़ाई चिंता

शिवपुरी | विशेष रिपोर्ट



शिवपुरी जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों प्रशासनिक विवादों, आदेशों की अनदेखी और लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के कारण चर्चा में है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के प्रभार को लेकर चल रहा विवाद अब केवल कुर्सी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसका असर जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर शिक्षा सुधार प्राथमिकता है या फिर पद और प्रभाव की लड़ाई?

सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तर से जारी आदेशों के बाद भी प्रभार परिवर्तन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इससे विभाग के भीतर भ्रम और असंतोष का माहौल बन गया है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शासन के आदेश समय पर लागू न हों तो इसका सीधा असर विभागीय अनुशासन और कार्यप्रणाली पर पड़ता है।

पुराने विवादों ने भी बढ़ाई विभाग की मुश्किलें

शिक्षा विभाग पहले भी कई विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। पूर्व में कुछ अधिकारियों से जुड़े विवादों ने विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया था। अब लगातार उठ रहे सवालों ने फिर से विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सबसे बड़ा असर

जिले में कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी, कमजोर परीक्षा परिणाम, निरीक्षण व्यवस्था में ढिलाई और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही जैसी शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब विभागीय ऊर्जा प्रशासनिक विवादों में खर्च होती है, तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ता है।

अब क्या होना चाहिए?

शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं—

शासन के सभी आदेशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित हो

DEO और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई जाए

विभागीय कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए

स्कूलों का नियमित निरीक्षण और रिजल्ट ऑडिट किया जाए

भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों में त्वरित कार्रवाई हो

शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्याओं के लिए हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र मजबूत किया जाए

सरकार और प्रशासन से उम्मीद

अब निगाहें जिला प्रशासन, ग्वालियर संभाग के अधिकारियों और मध्य प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा और कमजोर हो सकता है।

मुख्यमंत्री Mohan Yadav, स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएं।

India Aaj Tak.com

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

दिनांक : 28/05/2026

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