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न्यायपालिका गेट के बाहर नौतपा की झुलसा देने वाली धूप में पानी ढो रहे बच्चे, युवा व महिलाएं

  न्यायपालिका गेट के बाहर नौतपा की झुलसा देने वाली धूप में पानी ढो रहे बच्चे, युवा व महिलाएं  शपथ लेते ही जल हुआ संरक्षित, रुकी सिंध की सप्ल...

 न्यायपालिका गेट के बाहर नौतपा की झुलसा देने वाली धूप में पानी ढो रहे बच्चे, युवा व महिलाएं 

शपथ लेते ही जल हुआ संरक्षित, रुकी सिंध की सप्लाई, कलेक्टर पहुंचे, तो इतने दिन चल गई थी मोटर, अब फिर खराब 


शिवपुरी। बीते 25 मई को हमारे स्थानीय नेताओं ने प्रभारी मंत्री एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जल संरक्षित करने की शपथ क्या खाई, सिंध की सप्लाई ही ठप हो गई। ऐसा लगा कि मड़ीखेड़ा का जल डैम में ही संरक्षित रहना चाहता है। पिछली बार जब मोटरें खराब होने और सप्लाई रुकी थी, तो शिवपुरी का कोई भी स्थानीय जनप्रतिनिधि सतनबाड़ा फिल्टर प्लांट पर नहीं पहुंचा कि जाकर देख लें कि शहर में पानी क्यों नहीं पहुंच रहा। शहर में गहराए जल संकट को देखकर जब कलेक्टर अर्पित वर्मा ने फिल्टर प्लांट पर जाकर देखा, तो अगले दिन सप्लाई आ गई। कलेक्टर किसी नेता के कहने पर नहीं गए, क्योंकि यदि किसी के निर्देश पर जाते तो उनके साथ नेता के चरण सेवक जरूर साथ में जाकर फोटो सहित यह प्रचारित करते कि उन्होंने आपकी चिंता करके जिलाधीश को भेजा। जैसा पिछले दिनों वायरल हुए वीडियो में सर्द हवाओं के बीच आधी रात को प्रभारी मंत्री ने दरवाजा खटखटाकर लोगों को जगाया, और पूछा कि आप कैसे हैं, हमें महाराज ने आपके पास हालचाल जानने के लिए भेजा है, वो आपकी बहुत चिंता करते हैं। अब शहर में कोई पूछने नहीं आ रहा कि आप लोग कैसे हैं..? 

शहर को महत्वपूर्ण मूलभूत सुविधा पानी देने की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। जिसमें नपाध्यक्ष एवं सीएमओ के बीच ईरान-इजरायल जैसे हालात बने हुए हैं। नपा के यह दोनों किरदार भ्रष्टाचार एवं रिश्वतकांड में प्रमाणों सहित उलझे हुए हैं। ऐसे में शिवपुरी शहर की जनता को इन दोनों ही नपा प्रमुखों से कोई उम्मीद नहीं है। अब नम्बर आता है शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन का, तो उन्हें फिल्टर प्लांट जाने में लू- लपट लगने का डर है, इसलिए वो कलेक्ट्रेट की बैठकों में अपनी नाराजगी जताते हैं, जिसका कोई पॉजिटिव असर जलसंकट पर तो नजर नहीं आता। 

अब बात करें क्षेत्रीय सांसद की, तो बहुत जल्दी में आते हैं, और स्थानीय मुद्दों पर बात न करके केंद्र सरकार का विकसित 2047 का सपना बताकर चले जाते हैं। जनता 21 साल बाद विकसित भारत तभी देख पाएगी, जब उसे पानी जैसी आवश्यक मूलभूत सुविधा मिलेगी। 

चिलचिलाती गर्मी में देखा पानी ढोते हुए:

ग्वालियर से लौटते समय देखा कि शहर एवं फोरलेन बायपास की सीमा पर बसी कठमई आदिवासी बस्ती के पास पानी की टंकी शोपीस बनी हुई है। जिस तापमान में स्वास्थ्य विभाग घर से बाहर निकलने पर अलर्ट जारी कर रहा है, उस चिलचिलाती धूप में मासूम बच्चों से लेकर महिलाये व पुरुष उस टंकी से पानी ढो रहे थे, जो न्यायाधीश कॉलोनी के गेट के पास बनी हुई है।

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