शिवपुरी राज्य आजीविका मिशन में “जमे अफसरों” का सिंडिकेट? भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप! महिलाओं की योजनाओं पर डाका? नरवर से उठी आवाज ...
शिवपुरी राज्य आजीविका मिशन में “जमे अफसरों” का सिंडिकेट? भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप!
महिलाओं की योजनाओं पर डाका? नरवर से उठी आवाज अब भोपाल तक गूंजने लगी!
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief : विनोद विकट
मो. 9977708976
दिनांक : 28/05/2026
शिवपुरी / शिवपुरी जिले का राज्य आजीविका मिशन इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। विभाग के अंदर वर्षों से जमे अधिकारियों पर अब भ्रष्टाचार, सांठगांठ, फर्जीवाड़े और योजनाओं में भारी गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। मामला इतना गर्म हो चुका है कि प्रशासनिक गलियारों से लेकर भोपाल तक हलचल तेज बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार विभाग में वर्षों से पदस्थ कुछ अधिकारियों ने ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया है, जहां बिना “सेटिंग” कोई काम नहीं होता। फोटो में सामने आए नामों में अरविंद भार्गव, देवेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र उपाध्याय, सुनील दुबे, जितेंद्र दुबे, संपत सिंह यादव, वसीम खान, रामप्रसाद यादव सहित कई कर्मचारियों की लंबे समय से एक ही जगह पदस्थापना चर्चा का विषय बनी हुई है।
महिलाओं ने खोला मोर्चा, नरवर परियोजना अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
हाल ही में नरवर क्षेत्र की महिला समूहों ने परियोजना अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाकर पूरे विभाग की पोल खोल दी थी। महिलाओं का आरोप था कि योजनाओं का लाभ देने के नाम पर दबाव बनाया जाता है, फाइलों को रोका जाता है और समूहों को परेशान किया जाता है। अब यह मामला केवल नरवर तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे जिले के आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
अरविंद भार्गव पर भी उठे सवाल
विभाग में लंबे समय से पदस्थ बताए जा रहे अधिकारी अरविंद भार्गव पर भी अंदरखाने “घालमेल”, पसंदीदा लोगों को लाभ पहुंचाने और विभागीय कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। चर्चाएं हैं कि कई शिकायतें दबा दी जाती हैं और शिकायतकर्ताओं को ही प्रताड़ित किया जाता है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा से कार्रवाई की मांग
अब जिले में मांग उठ रही है कि कलेक्टर अर्पित वर्मा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएं। लोगों का कहना है कि यदि पिछले कई वर्षों की पदस्थापना, समूहों को दिए गए भुगतान, योजनाओं के रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
भोपाल तक पहुंची चर्चा, क्या सरकार लेगी बड़ा एक्शन?
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सवाल मुख्यमंत्री मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्वालियर कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच रहे हैं। चर्चा है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई गई तो शिवपुरी का यह मामला प्रदेश स्तर का बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि —
क्या सरकार महिलाओं की आवाज सुनेगी, या फिर वर्षों से जमे अधिकारियों का “सिस्टम” ऐसे ही चलता रहेगा?

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