🛑 ब्रेकिंग पॉलिटिकल धमाका | शिवपुरी की राजनीति में फिर बड़ा उलटफेर! 🛑 India Aaj Tak.com Editor-in-Chief: Vinod Vikat मो.: 9977708976 दिना...
🛑 ब्रेकिंग पॉलिटिकल धमाका | शिवपुरी की राजनीति में फिर बड़ा उलटफेर! 🛑
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
मो.: 9977708976
दिनांक: 27/05/2026
“हाथ से कमल... और अब नई सियासी चाल!”
वीरेंद्र रघुवंशी की अगली राजनीति ने भोपाल तक बढ़ाई हलचल
शिवपुरी और कोलारस की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधायक Virendra Raghuvanshi चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। कभी कांग्रेस के “हाथ” के पंजे पर चुनाव जीतकर उपचुनाव में विधायक बनने वाले वीरेंद्र रघुवंशी ने बाद में भाजपा का “कमल” थामकर कोलारस से जीत दर्ज की थी। लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है — आखिर वीरेंद्र रघुवंशी की अगली सियासी मंज़िल क्या है?
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस छोड़ने के बाद अब रघुवंशी शिवपुरी विधानसभा में अपनी नई रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। उनकी लगातार बढ़ती सक्रियता और भाजपा के पूर्व सांसद K. P. Yadav के साथ हालिया मौजूदगी ने राजनीतिक पारा अचानक चढ़ा दिया है। शिवपुरी से लेकर भोपाल तक चर्चा तेज है कि क्या कोई बड़ा राजनीतिक समीकरण तैयार हो रहा है?
वीरेंद्र रघुवंशी का राजनीतिक सफर हमेशा उतार-चढ़ाव और बगावती तेवरों से भरा रहा है। पहले कांग्रेस से उपचुनाव जीते, फिर भाजपा में गए, बाद में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटे और अब कांग्रेस से भी दूरी बना चुके हैं। उनके इस्तीफे और दल बदल ने पहले भी शिवपुरी की राजनीति में भूचाल मचाया था। �
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वीरेंद्र रघुवंशी शिवपुरी सीट से चुनावी तैयारी में जुटे हैं, तो आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस दोनों की रणनीति प्रभावित हो सकती है। खास बात यह है कि रघुवंशी का अपना एक अलग जनाधार माना जाता है और वह सिंधिया समर्थक राजनीति के विरोध और समर्थन — दोनों चरणों में सुर्खियों में रह चुके हैं। �
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अब सवाल यह उठ रहा है —
क्या वीरेंद्र रघुवंशी फिर बदलेंगे पाला?
क्या भाजपा में वापसी की पटकथा लिखी जा रही है?
या शिवपुरी में तीसरा बड़ा राजनीतिक मोर्चा बनने वाला है?
शिवपुरी की चाय की दुकानों से लेकर भोपाल के सत्ता गलियारों तक सिर्फ एक ही चर्चा है —
🔥 “वीरेंद्र रघुवंशी का अगला दांव किसे करेगा बेदम?” 🔥
फिलहाल रघुवंशी ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन उनकी बढ़ती सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनाव में शिवपुरी की राजनीति शांत रहने वाली नहीं है। �


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