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शिवपुरी की प्यास बनेगी सत्ता के लिए सबसे बड़ा संकट?

  शिवपुरी की प्यास बनेगी सत्ता के लिए सबसे बड़ा संकट? “जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी, नेता एसी कमरों में व्यस्त — क्या भाजपा को मिलेगा जनता का...

 शिवपुरी की प्यास बनेगी सत्ता के लिए सबसे बड़ा संकट?

“जनता बूंद-बूंद पानी को तरसी, नेता एसी कमरों में व्यस्त — क्या भाजपा को मिलेगा जनता का जवाब?”

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob : 09977708976

Date : 29/05/2026




शिवपुरी / मध्यप्रदेश के शिवपुरी में इस समय हालात इतने भयावह हैं कि लोग कहने लगे हैं —

“अगर पानी नहीं मिला, तो वोट भी नहीं मिलेगा!”

भीषण गर्मी, 44 डिग्री तापमान, सूखे नल, बंद ट्यूबवेल और सड़कों पर पानी के डिब्बों के साथ भटकती जनता… यह तस्वीर किसी रेगिस्तान की नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र शिवपुरी की है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार, प्रदेश में भाजपा की सरकार, जिले के प्रभारी मंत्री भाजपा के, सांसद भाजपा के, विधायक भाजपा के, नगर पालिका भाजपा की… फिर भी जनता प्यास से क्यों तड़प रही है?

“वोट लेकर भूल गए नेता?”

शहर में सिंध जलावर्धन योजना के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए।

54 करोड़ की योजना 200 करोड़ तक पहुंच गई, लेकिन जनता के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया।

15 साल से रिपेयर, लीकेज, मोटर खराब, पाइप लाइन फटना और भुगतान का खेल चलता रहा, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई।

जनता अब खुलकर कह रही है कि —

“चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े पोस्टर लगते हैं, लेकिन गर्मी आते ही पानी गायब हो जाता है।”

भाजपा सरकार के लिए खतरे की घंटी!

शिवपुरी में जो गुस्सा पानी को लेकर दिखाई दे रहा है, वह आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए बड़ा नुकसान बन सकता है।

लोग पूछ रहे हैं कि जब जनता बूंद-बूंद पानी के लिए सड़कों पर लाइन लगा रही थी, तब जनप्रतिनिधि कहां थे?

न कोई धरना…

न कोई बड़ा आंदोलन…

न कोई सख्त कार्रवाई…

सिर्फ बयान और फोन कॉल!

जनता का आरोप है कि नेताओं को सिर्फ चुनाव में वोट चाहिए, लेकिन संकट के समय जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।

कांग्रेस भी सवालों के घेरे में

विपक्ष होने के बावजूद कांग्रेस भी मैदान में नजर नहीं आई।

शहर में इतना बड़ा जल संकट खड़ा हो गया, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई बड़ा जनआंदोलन दिखाई नहीं दिया।

यानी जनता खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रही है।

“वाटर कैंपरों ने बचाई शहर की इज्जत”

यदि निजी वाटर कैंपर और वाटर एटीएम नहीं होते, तो हालात और विस्फोटक हो सकते थे।

लोग पैसे देकर पानी खरीद रहे हैं, जबकि सरकारें करोड़ों खर्च करने के दावे कर रही हैं।

शिवपुरी की जनता अब यह सवाल पूछ रही है —

“जब पानी नहीं दे सके, तो फिर विकास के दावे किस बात के?”

जनता का मूड बदल रहा है

शहर के कई इलाकों में लोग खुलकर कहने लगे हैं कि इस बार पानी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा।

क्योंकि जनता अब सड़क, भाषण और पोस्टर नहीं…

सीधे अपने घर में पानी चाहती है।

अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो शिवपुरी का जल संकट भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक सुनामी बन सकता है।

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