> प्रशासनिक शतरंज बिछी, किस एसडीएम की कुर्सी खिसकेगी कौन होगा फिट चर्चाओं ने पकड़ा ज़ोर * शुक्ला जी को सौंपीं भरपूर और महत्वपूर्ण जिम्मे...
> प्रशासनिक शतरंज बिछी, किस एसडीएम की कुर्सी खिसकेगी कौन होगा फिट
चर्चाओं ने पकड़ा ज़ोर
* शुक्ला जी को सौंपीं भरपूर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ
प्रशासनिक हलचल / बेचैन 👁️नजर
शिवपुरी / शिवपुरी में प्रशासनिक फेरबदल की आहट अब फुसफुसाहट से निकलकर खुली चर्चा बन चुकी है। कलेक्ट्रेट के बरामदों से लेकर नेताओं के ड्राइंग रूम तक इन दिनों एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर किस अनुविभाग में कौन सा अफसर फिट होगा और किसकी कुर्सी सरकने वाली है। करैरा, कोलारस, पोहरी और पिछोर को लेकर सबसे ज्यादा हलचल है। कई एसडीएम के नाम इधर से उधर तैर रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में अपनी पसंद की जमावट कराने की कवायद तेज हो गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा करैरा को लेकर है, जहां विधायक और एसडीएम अनुराग निगवाल के बीच चल रहा विवाद लंबे समय से सुर्खियों में है । राजनीतिक गलियारों में चटखारे लेकर कहा जा रहा है कि विधायक जी अब भी मुँह फुलाए घूम रहे हैं और राजधानी तक जाकर बदलाव का राग छेड़ रहे हैं। अपनी कार्यशैली से अनुराग आमजन की पसंद तो हैं मगर विधायक को नहीं भा रहे हैं । दूसरी तरफ कोलारस में पदस्थ अनूप श्रीवास्तव का नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है। चर्चाएं हैं कि शिवपुरी विधायक उन्हें मुख्यालय में लाने के लिए पूरा दम लगाए हुए हैं। हालांकि जानकार यह भी कह रहे हैं कि वे कलेक्टर की कार्यशैली में पूरी तरह फिट नहीं बैठते, लेकिन राजनीति में समीकरण अक्सर फाइलों से ज्यादा भारी पड़ जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि श्रीवास्तव पहले से ही शिवपुरी में बंगला आवंटित करा चुके हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वे राजवत जी को पीछे छोड़ मुख्यालय की कुर्सी तक पहुंच सकते हैं। हालांकि कोलारस से उनकी विदाई हुई तो वे लाल बिल्डिंग मे बैठते हैं या एसडीएम बनाकर आते हैं ये सवाल खूब उछाल रहा है ।
उधर कलेक्ट्रेट में बैठे शिवदयाल धाकड़ और जेपी गुप्ता को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की सुगबुगाहट है।
वहीं पिछले कलेक्टर रवीन्द्र कुमार के दौर में किनारे पड़े एडीएम शुक्ला जी को नए कलेक्टर ने फिर से महत्व देना शुरू कर दिया है। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने के बाद अब उनका प्रशासनिक वजन भी तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। फिलहाल सबकी नजर इसी पर टिकी है कि अंतिम बाजी कलेक्टर के हाथ रहेगी या फिर नेताओं के प्रिय पात्र बाजी मार ले जाएंगे।---- खैर आगे आगे देखिए होता है क्या

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