शिवपुरी नगर पालिका पर जनता के तीखे सवाल आखिर सहायक यंत्री सचिन चौहान वर्ष 2017 से लगातार शिवपुरी में कैसे पदस्थ हैं? क्या शिवपुरी नगर पालि...
शिवपुरी नगर पालिका पर जनता के तीखे सवाल
आखिर सहायक यंत्री सचिन चौहान वर्ष 2017 से लगातार शिवपुरी में कैसे पदस्थ हैं?
क्या शिवपुरी नगर पालिका में ऐसा कौन सा चमत्कारिक विकास हुआ है, जिसके कारण उनका कभी स्थानांतरण नहीं हुआ?
जब सीएमओ बदले, अध्यक्ष बदले, जनप्रतिनिधि बदले, सरकारें बदलीं, तब एक तकनीकी अधिकारी को क्यों नहीं बदला गया?
क्या नगर पालिका के इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली की कभी निष्पक्ष समीक्षा हुई?
करोड़ों रुपये की योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता को क्यों नहीं मिला?
यदि विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण हुए थे तो शहर की सड़कें, नालियां और मूलभूत सुविधाएं सवालों के घेरे में क्यों हैं?
नगर पालिका की प्रत्येक बड़ी योजना में विवाद और शिकायतों की चर्चा क्यों होती रही?
क्या किसी एजेंसी ने निर्माण कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराया?
यदि ऑडिट हुआ तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
यदि ऑडिट नहीं हुआ तो आखिर क्यों नहीं हुआ?
कलेक्टर अर्पित वर्मा से जनता के सवाल
क्या कलेक्टर ने नगर पालिका के तकनीकी विभाग की कार्यप्रणाली की कभी विशेष समीक्षा की?
क्या नौ वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी का रिकॉर्ड प्रशासन के संज्ञान में नहीं है?
क्या जिले में स्थानांतरण नीति केवल कुछ अधिकारियों पर ही लागू होती है?
क्या विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त शिकायतों की जांच कराई गई?
यदि शिकायतें मिलीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि शिकायतें नहीं मिलीं तो जनता लगातार परेशान क्यों है?
क्या कलेक्टर कार्यालय नगर पालिका के निर्माण कार्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने को तैयार है?
जनप्रतिनिधियों से जनता के सवाल
सांसद और विधायक आखिर नौ वर्षों तक क्या देखते रहे?
क्या किसी जनप्रतिनिधि ने सचिन चौहान के कार्यकाल की समीक्षा की मांग की?
क्या किसी ने शासन को पत्र लिखकर स्थानांतरण या जांच की मांग की?
क्या किसी ने नगर पालिका के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाया?
यदि नहीं उठाया तो क्यों नहीं उठाया?
क्या जनता की शिकायतें जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंचीं?
यदि पहुंचीं तो फिर कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की गई?
सबसे बड़े सवाल
आखिर सचिन चौहान पर इतनी मेहरबानी क्यों?
क्या शिवपुरी में कोई दूसरा सक्षम तकनीकी अधिकारी नहीं है?
क्या नौ वर्षों तक एक ही स्थान पर बने रहना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है?
क्या नगर पालिका के करोड़ों रुपये के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच होगी?
क्या जनता को कभी बताया जाएगा कि विकास कार्यों में खर्च हुए धन का वास्तविक परिणाम क्या रहा?
क्या जवाबदेही तय होगी या सवाल पूछने वाली जनता को ही चुप रहने की सलाह दी जाएगी?
आखिर शिवपुरी के विकास की जिम्मेदारी कौन लेगा?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या नगर पालिका में सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो फिर जांच से डर किस बात का है?

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