CMHO निलंबन के बाद स्टे लेकर फिर कुर्सी पर लौटे डॉ. संजय ऋषिश्वर! शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, अब सरकार और प्रशासन पर उठ रहे बड...
CMHO निलंबन के बाद स्टे लेकर फिर कुर्सी पर लौटे डॉ. संजय ऋषिश्वर!
शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, अब सरकार और प्रशासन पर उठ रहे बड़े सवाल
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
Mob: 9977708976
Date: 28/05/2026
शिवपुरी / मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों में निलंबित किए गए प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय ऋषिश्वर अब न्यायालय से स्टे लेकर दोबारा अपनी कुर्सी पर बैठ गए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे स्वास्थ्य विभाग में सनसनी फैला दी है।
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित एक महत्वपूर्ण प्रकरण में डॉ. संजय ऋषिश्वर को संपर्क अधिकारी बनाया गया था, लेकिन समय पर जवाब और पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने के कारण विभाग की किरकिरी हुई। मामला कोर्ट अवमानना तक पहुंचा और आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। लेकिन अब स्टे मिलने के बाद उनकी वापसी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शिवपुरी जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं, कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, निरीक्षण व्यवस्था ठप पड़ी हुई बताई जा रही है और मरीज परेशान हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
फोटो में दर्ज अधिकारियों के नाम भी अब चर्चाओं के केंद्र में हैं। इनमें डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. राजेश, डॉ. चेतन सिंह कुशवाह, डॉ. सैफी बानो, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. सविता सक्सेना, डॉ. विशाल बुंदेला और डॉ. महेंद्र कुशवाह जैसे अधिकारी लंबे समय से जिले में पदस्थ बताए जा रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि कई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और फील्ड निरीक्षण के बजाय सिर्फ कार्यालयों तक सीमित हो चुके हैं।
अब इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन और ग्वालियर संभाग के कमिश्नर को शिवपुरी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए। जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर जब स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बदहाल हो रही हैं, तब जिम्मेदार अधिकारियों पर व्यापक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में एम्बुलेंस व्यवस्था, दवा वितरण और चिकित्सकीय निरीक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर निगरानी कमजोर पड़ चुकी है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
अब निगाहें शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा पर भी टिकी हुई हैं। जिले की जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच कराई जाए, लंबे समय से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
CMHO के निलंबन, फिर स्टे और उसके बाद वापसी ने यह साफ कर दिया है कि शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग के अंदर सब कुछ सामान्य नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा प्रशासनिक एवं राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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