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बीआरसी ने बताई खामियां, डीपीसी कार्यालय ने दे दी मान्यता: शिवपुरी के 25 निजी स्कूलों की स्वीकृति पर उठे गंभीर सवाल

Indiaaajtak.in दिनांक : 20 जून 2026 Editor-in-Chief : Vinod Vikat Mob. : 9977708976 बीआरसी ने बताई खामियां, डीपीसी कार्यालय ने दे दी मान्यता...


Indiaaajtak.in

दिनांक : 20 जून 2026

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob. : 9977708976

बीआरसी ने बताई खामियां, डीपीसी कार्यालय ने दे दी मान्यता: शिवपुरी के 25 निजी स्कूलों की स्वीकृति पर उठे गंभीर सवाल



शिवपुरी। जिले का शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शिवपुरी ब्लॉक के लगभग 25 निजी स्कूलों को लेकर सामने आए मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली, स्कूल मान्यता प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिन स्कूलों को निरीक्षण के दौरान आवश्यक सुविधाओं के अभाव में मान्यता न देने की अनुशंसा की गई थी, उन्हें बाद में विभागीय स्तर पर स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

जानकारी के अनुसार शिवपुरी ब्लॉक के बीआरसी द्वारा निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान कई स्कूलों में खेल मैदान, पर्याप्त शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी पाई गई। निरीक्षण रिपोर्ट में इन कमियों का उल्लेख करते हुए संबंधित स्कूलों को मान्यता न देने की अनुशंसा की गई थी। इसके बावजूद बाद में इन्हीं स्कूलों को मान्यता मिलने की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

शहर और जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि निरीक्षण रिपोर्ट में कमियां दर्ज थीं तो आखिर किन आधारों पर मान्यता प्रदान की गई। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि स्कूल केवल भवन का नाम नहीं होता, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक सभी सुविधाओं का उपलब्ध होना भी अनिवार्य है। ऐसे में खेल मैदान, शौचालय और सुरक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं के अभाव को नजरअंदाज करना बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है।

इस संबंध में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) दफेदार सिंह सिकरवार से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा समय-समय पर कुछ नियमों में शिथिलता प्रदान की गई है। हालांकि जब खेल मैदान और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मान्यता दिए जाने के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने संबंधित सूची उपलब्ध कराने और मामले की जांच कराने की बात कही।

जिले में एक ओर सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या घट रही है और कई विद्यालय बंद होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या निजी विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं।

शिक्षा विभाग को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। विभाग पूर्व में भी विभिन्न मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पूर्व डीपीसी अशोक त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान भी विभागीय स्तर पर कई विवाद सामने आए थे। उस समय एक विभागीय विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला पुलिस तक पहुंच गया था। बाद में उनका स्थानांतरण हो गया, लेकिन जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को उस समय विवादों का केंद्र माना जाता था, उनमें से कुछ आज भी विभाग में प्रभावशाली स्थिति में बने हुए हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले वर्षों में जिले के प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों की मरम्मत, भवन सुधार और अन्य विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि इन राशियों का कितना उपयोग हुआ, किन कार्यों पर खर्च हुआ और उसका वास्तविक लाभ विद्यालयों तक कितना पहुंचा। कई विद्यालयों की जमीनी स्थिति देखकर लोग खर्च और कार्यों की गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। मुरैना निवासी एवं पूर्व पार्षद सुरेश सिंह सिकरवार ने कलेक्टर को शिकायत देकर उनकी शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति और पदोन्नति प्रक्रिया की जांच की मांग की है। शिकायत में विभिन्न अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। वहीं डीपीसी का कहना है कि शिकायतकर्ता उनके पुराने परिचित हैं और पूर्व में भी ऐसी शिकायतें कर चुके हैं। उनके अनुसार सभी आरोपों के जवाब उनके पास उपलब्ध हैं और लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं।

पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि निरीक्षण रिपोर्टों में दर्ज कमियों के बावजूद स्कूलों को स्वीकृति मिल रही है, यदि विभागीय अधिकारियों पर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं और यदि करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता कैसे बनी रहेगी। शिक्षा केवल व्यवसाय नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार है। ऐसे में आवश्यक है कि स्कूल मान्यता से लेकर विकास कार्यों तक प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह हो।

अब जिले के लोगों की निगाहें कलेक्टर अर्पित वर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) विजयराज, ग्वालियर संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा भोपाल स्थित शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। यदि लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होना जरूरी है, और यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग को सार्वजनिक रूप से तथ्य प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल शिवपुरी का शिक्षा विभाग स्कूल मान्यता, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा नजर आ रहा है, जिसका जवाब जिले के अभिभावक, विद्यार्थी और आम नागरिक जानना चाहते हैं।


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