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करैरा का बहुचर्चित भूमि घोटाला: विधायक पुत्र के नाम दर्ज 5 बीघा सरकारी जमीन पर कार्रवाई कब? जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर उठे सवाल

  Indiaaajtak.in दिनांक : 20 जून 2026 Editor-in-Chief : Vinod Vikat Mob. : 9977708976 करैरा का बहुचर्चित भूमि घोटाला: विधायक पुत्र के नाम दर...

 Indiaaajtak.in

दिनांक : 20 जून 2026

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob. : 9977708976

करैरा का बहुचर्चित भूमि घोटाला: विधायक पुत्र के नाम दर्ज 5 बीघा सरकारी जमीन पर कार्रवाई कब? जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर उठे सवाल

सरकारी जमीन को निजी खातों में दर्ज करने के गंभीर आरोप, मामला उजागर हुए हफ्तों बीते लेकिन प्रशासन अब तक खामोश


करैरा/शिवपुरी। करैरा तहसील में सामने आए बहुचर्चित भूमि फर्जीवाड़े और सरकारी जमीनों को निजी खातों में दर्ज करने के मामले में प्रशासनिक सुस्ती और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है। दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर उजागर हुए इस मामले में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि खुर्द-बुर्द होने के आरोप लगे हैं, लेकिन अब तक न तो किसी प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है और न ही राजस्व विभाग ने सार्वजनिक रूप से कोई ठोस कार्रवाई सामने रखी है।

मामले में सबसे चर्चित आरोप यह है कि करैरा क्षेत्र के वर्तमान विधायक रमेश खटीक के पुत्र के नाम लगभग 5 बीघा जमीन दर्ज पाई गई, जबकि आरोप है कि उक्त भूमि मूल रूप से सरकारी थी। राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ, किस अधिकारी ने अनुमति दी, किस आधार पर नामांतरण हुआ और किन परिस्थितियों में सरकारी भूमि निजी खातों में पहुंची, इन सवालों का जवाब आज तक प्रशासन नहीं दे पाया है।

मामला उजागर होते ही हटाए गए तत्कालीन एसडीएम

भूमि घोटाले के खुलासे के बाद तत्कालीन एसडीएम अनुराग निगवाल को विभिन्न आरोपों के चलते करैरा से हटा दिया गया। हालांकि उनके हटने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी, लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

45 करोड़ की सरकारी जमीन खुर्द-बुर्द होने के आरोप

प्रकाशित दस्तावेजों के अनुसार फर्जी आदेशों और रिकॉर्ड में हेरफेर के माध्यम से लगभग 47 बीघा सरकारी भूमि, जिसकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है, निजी खातों में दर्ज कर दी गई। कई मामलों में पुराने आदेशों के आधार पर रिकॉर्ड बदले गए, जबकि कुछ मामलों में रिकॉर्ड पोर्टल से गायब होने और अधिकार अभिलेख अपलोड न होने जैसे गंभीर तथ्य भी सामने आए।

वर्तमान अधिकारी जवाब देने से बच रहे?

मामले की जानकारी लेने के लिए वर्तमान एसडीएम अनुपम शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और कॉल वॉइस मेल पर चली गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना बड़ा मामला होने के बावजूद प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहा।

वहीं दिनारा के नायब तहसीलदार लज्जाराम से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि, "मैं अभी यहां आया हूं, यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है।"

दूसरी ओर करैरा तहसीलदार ललित शर्मा ने इस संबंध में नायब तहसीलदार से जानकारी लेने की बात कहकर स्वयं कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

जांच में देरी से बढ़ रहे संदेह

राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से निजी खातों में दर्ज किया गया है तो यह केवल राजस्व अनियमितता नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक मामला है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड से छेड़छाड़, कूटरचना, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और षड्यंत्र जैसी धाराओं के तहत पुलिस प्रकरण दर्ज होना चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सामान्य व्यक्ति के खिलाफ राजस्व संबंधी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो करोड़ों की सरकारी जमीन के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और लाभ लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

जनता पूछ रही—कब होगी एफआईआर?

भूमि घोटाले का मामला सामने आए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो पुलिस जांच शुरू हुई और न ही किसी बड़े नाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। इससे आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है।

यदि राजस्व अभिलेखों में वास्तव में सरकारी भूमि को निजी नामों में दर्ज किया गया है तो प्रशासन को तत्काल विशेष जांच दल गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराना चाहिए।

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