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शिवपुरी में खाद का बड़ा खेल! रैली, ज्ञापन, ट्रक जब्ती और जांच समिति के बीच उलझा पूरा मामला, किसानों के हिस्से की खाद आखिर जा कहां रही है?

  Indiaaajtak.in Editor-in-Chief : Vinod Vikat Mob. : 9977708976 दिनांक : 20 जून 2026 शिवपुरी में खाद का बड़ा खेल! रैली, ज्ञापन, ट्रक जब्ती ...

 Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob. : 9977708976

दिनांक : 20 जून 2026

शिवपुरी में खाद का बड़ा खेल! रैली, ज्ञापन, ट्रक जब्ती और जांच समिति के बीच उलझा पूरा मामला, किसानों के हिस्से की खाद आखिर जा कहां रही है?







शिवपुरी। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले शिवपुरी जिले में खाद संकट, कालाबाजारी और अवैध परिवहन का मामला लगातार गहराता जा रहा है। पिछले दस दिनों के भीतर जिले में जिस तेजी से घटनाक्रम सामने आए हैं, उन्होंने प्रशासन, राजनीति और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान संगठनों के आंदोलन, लगातार ज्ञापन, डीएपी खाद से भरे ट्रकों की जब्ती, राजनीतिक चर्चाओं और जांच समिति के गठन ने पूरे मामले को जिले के सबसे चर्चित मुद्दों में ला खड़ा किया है।

जिले में खाद संकट को लेकर सबसे पहले भारतीय किसान संघ ने मोर्चा खोला। जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए और रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि जिले की कई सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है, ई-टोकन व्यवस्था प्रभावित है और किसान खाद के लिए भटकने को मजबूर हैं। किसानों ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

किसानों के आंदोलन के एक-दो दिन बाद ही कोलारस में मां कैला देवी कोल्ड स्टोर परिसर में डीएपी खाद से भरा ट्रक पकड़े जाने की खबर सामने आई। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में खाद जब्त की गई तथा ट्रक चालक और हेल्पर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लेकिन कार्रवाई के बाद ही सवाल उठने लगे कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद आखिर किसके लिए लाई जा रही थी और इसका वास्तविक मालिक कौन है।

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब स्थानीय स्तर पर भाजपा से जुड़े एक नेता का नाम चर्चाओं में सामने आने लगा। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है और जांच अभी जारी है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी।

बढ़ते दबाव और लगातार उठ रहे सवालों के बीच कलेक्टर अर्पित वर्मा ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी। समिति को खाद की खरीद, परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच जिले में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई। शिवपुरी शहर में कृषि विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 79 बोरी डीएपी खाद अवैध परिवहन करते हुए पकड़ी। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों द्वारा खाद के वैध दस्तावेज, बिल अथवा ई-टोकन प्रस्तुत नहीं किए जा सके। कृषि विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि मामला केवल कोलारस तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य हिस्सों में भी खाद के अवैध परिवहन और भंडारण की गतिविधियां चल रही हैं।

उधर कोलारस में कांग्रेस ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केवल ट्रक चालक और हेल्पर के खिलाफ कार्रवाई कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि असली जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है। पार्टी ने मांग की कि खाद मंगवाने वाले, भंडारण कराने वाले और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

दूसरी ओर भारतीय किसान संघ ने भी प्रशासन से मांग की है कि जांच केवल परिवहनकर्ताओं तक सीमित न रखी जाए। संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद का परिवहन बिना किसी संगठित नेटवर्क, व्यापारी, बिचौलिए या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका के संभव नहीं है। किसान संघ ने वेयरहाउस और कोल्ड स्टोर संचालकों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जब किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे थे, तब सैकड़ों बोरियां डीएपी खाद निजी परिसरों और वाहनों तक कैसे पहुंच रही थीं? यदि खाद की कमी थी तो यह खाद किसके लिए सुरक्षित रखी जा रही थी? क्या जिले में कालाबाजारी का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? यदि हां, तो उसके पीछे कौन लोग हैं? क्या इसमें केवल व्यापारी शामिल हैं या फिर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण भी प्राप्त है?

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन में डीएपी खाद की मांग सबसे अधिक होती है। ऐसे समय में यदि खाद का अवैध भंडारण और परिवहन होता है तो इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। किसान या तो महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होते हैं या फिर समय पर बुवाई नहीं कर पाते।

फिलहाल जिले भर में खाद को लेकर चल रही कार्रवाई, ज्ञापन और राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। किसान और आम जनता यह जानना चाहती है कि आखिर किसानों के हिस्से की खाद किसके गोदामों तक पहुंच रही थी और इस पूरे खेल का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है या फिर खाद के इस कथित नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली चेहरों तक भी पहुंचती है। क्योंकि शिवपुरी जिले का किसान अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे सच के सामने आने का इंतजार कर रहा है।

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