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283 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? वेतन और ईपीएफ भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, कलेक्टर अर्पित वर्मा से जांच की मांग

  283 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? वेतन और ईपीएफ भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, कलेक्टर अर्पित वर्मा से जांच की मांग शिवपुरी। जिले के स्वास्थ्य...

 283 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़? वेतन और ईपीएफ भुगतान में गड़बड़ी के आरोप, कलेक्टर अर्पित वर्मा से जांच की मांग


शिवपुरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और ईपीएफ भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों, बैंक खातों की एंट्री तथा जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों से यह मामला अब प्रशासनिक जांच का विषय बनता जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें शासन द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा, जबकि ईपीएफ कटौती और जमा राशि को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने सीएमएचओ कार्यालय को दिए आवेदन में उल्लेख किया है कि उन्हें 15 नवंबर 2025 से सेवाओं में लगाया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी दर 475 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 14,250 रुपये प्रतिमाह बनती है, जबकि उन्हें मात्र 7 हजार से 9 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है।

दस्तावेज़ों के साथ संलग्न बैंक संदेशों में कुछ कर्मचारियों के खातों में 7 हजार एवं 9 हजार रुपये जमा होने के प्रमाण भी प्रस्तुत किए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लगभग छह माह से अधिक समय तक कार्य करने के बाद भी उन्हें निर्धारित वेतन नहीं मिला। उनका आरोप है कि वेतन भुगतान में बड़ी विसंगति है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ईपीएफ से जुड़ा हुआ है। कर्मचारियों का दावा है कि उनके नाम पर ईपीएफ खाते तो खोले गए, लेकिन खातों में अंशदान जमा नहीं हुआ। प्रस्तुत स्क्रीनशॉट और दस्तावेज़ों में भी ईपीएफ राशि जमा होने की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं देती। कर्मचारियों का आरोप है कि यदि शासन के नियमों के अनुसार ईपीएफ और ईएसआई की राशि जमा की जा रही है तो इसकी वास्तविक एंट्री कर्मचारियों के खातों में क्यों नहीं दिखाई दे रही।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों द्वारा पूर्व में कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कर्मचारियों का कहना है कि उनसे दबाव बनाकर यह लिखवा लिया जाता है कि उन्हें पूरा वेतन प्राप्त हो रहा है, जबकि बैंक खातों की वास्तविक स्थिति कुछ और कहानी बयां कर रही है।

जिले में कार्यरत 283 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन और ईपीएफ भुगतान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें कलेक्टर अर्पित वर्मा पर टिकी हुई हैं। कर्मचारियों और उनके परिजनों की मांग है कि सभी कर्मचारियों की बैंक पासबुक, वेतन भुगतान अभिलेख, ईपीएफ खाते और संबंधित कंपनी के भुगतान रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

यदि कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल वेतन विसंगति का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों और बच्चों के भविष्य से जुड़े गंभीर आर्थिक शोषण का प्रकरण साबित हो सकता है। जिलेवासियों की अपेक्षा है कि कलेक्टर अर्पित वर्मा इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

मो. : 09977708976

दिनांक : 08 जून 2026

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