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निजी जमीनों को सरकारी बताकर हड़पने की साजिश या प्रशासनिक लापरवाही?

  बदरवास में बड़ा भूमि घोटाला! निजी जमीनों को सरकारी बताकर हड़पने की साजिश या प्रशासनिक लापरवाही? रिपोर्ट: विनोद विकट Editor-in-Chief, India...

 बदरवास में बड़ा भूमि घोटाला!

निजी जमीनों को सरकारी बताकर हड़पने की साजिश या प्रशासनिक लापरवाही?

रिपोर्ट: विनोद विकट


Editor-in-Chief, IndiaAajTak.in

मो. 99777 08976

दिनांक: 07 जून 2026

शिवपुरी/बदरवास। शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गई है। क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि को राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि दर्शाकर कब्जाने और हस्तांतरण करने का प्रयास किया गया है। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है तथा पूरे गांव ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से उनके कब्जे एवं स्वामित्व में रही भूमि के रिकॉर्ड में संदिग्ध तरीके से बदलाव किए गए। कुछ खसरा नंबरों को सरकारी भूमि दर्शाते हुए राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया गया, जबकि संबंधित भूमि पर किसानों का वर्षों पुराना मालिकाना हक एवं कब्जा मौजूद है। मामले से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दस्तावेजों में दिख रही विसंगतियां

ग्रामीणों का कहना है कि विभिन्न वर्षों के राजस्व रिकॉर्ड, खसरा प्रतियां एवं अभिलेखों का मिलान करने पर कई विरोधाभास सामने आए हैं। यदि दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि रिकॉर्ड में बदलाव किन परिस्थितियों में और किसके आदेश पर किए गए।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि भूमि वास्तव में सरकारी थी तो दशकों तक किसानों के नाम रिकॉर्ड में क्यों दर्ज रहे? और यदि भूमि निजी थी तो उसे सरकारी श्रेणी में दर्ज करने की प्रक्रिया किस आधार पर अपनाई गई?

जिम्मेदार कौन?

मामले ने अब केवल भूमि विवाद का स्वरूप नहीं रखा है, बल्कि यह राजस्व विभाग की जवाबदेही का भी विषय बन गया है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि—

क्या रिकॉर्ड में बदलाव नियमानुसार किया गया?

क्या संबंधित किसानों को कोई नोटिस दिया गया?

क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति प्राप्त की गई?

यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

इन सवालों के जवाब फिलहाल प्रशासन के पास नहीं दिखाई दे रहे हैं।

ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल कुछ किसानों की जमीन का मामला नहीं, बल्कि पूरे गांव के अधिकारों और विश्वास से जुड़ा विषय है।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है। प्रशासन की यह चुप्पी संदेहों को और गहरा कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो फिर जांच से परहेज क्यों?

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, संभागीय आयुक्त एवं राज्य शासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बदरवास में सामने आया यह मामला महज एक प्रशासनिक भूल है या फिर सरकारी तंत्र की आड़ में निजी जमीनों को हड़पने का सुनियोजित खेल? इसका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

— विनोद विकट

Editor-in-Chief, IndiaAajTak.in

शिवपुरी (म.प्र.)

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