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सतनबाड़ा वन परिक्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल, क्या होगी निष्पक्ष जांच?
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
मो.: 09977708976
दिनांक: 04/06/2026
सवालों के घेरे में वन विभाग की कार्यप्रणाली, क्या सेटेलाइट इमेज से होगी सच्चाई की पड़ताल?
शिवपुरी वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सतनबाड़ा और नरवर वन क्षेत्र को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2021 से वर्तमान तक वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन, अवैध वृक्ष कटाई, वन भूमि पर अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियों के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। जागरूक नागरिकों द्वारा समय-समय पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच के परिणाम सार्वजनिक नहीं हो सके।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वन सुरक्षा के दावे किए जाते रहे हैं, तो फिर जंगलों से लकड़ी कटाई, मुरम, कोपरा, काली मिट्टी, बजरी और रेत के अवैध उत्खनन की शिकायतें लगातार क्यों सामने आती रहीं? कई मामलों में वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग आज भी बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की शिकायतें हुईं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, कुछ वन अधिकारियों के कार्यकाल में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई होने की बात भी सामने आई, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर पहले शिकायतों पर प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
मुख्य सवाल जिनका जवाब जरूरी है
वर्ष 2021 से अब तक सतनबाड़ा और नरवर क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज की जांच क्यों नहीं कराई गई?
वन भूमि पर हुए कथित अतिक्रमणों की वास्तविक स्थिति क्या है?
अवैध उत्खनन और वृक्ष कटाई की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
शिकायतों की जांच किन अधिकारियों को सौंपी गई और उनकी रिपोर्ट क्या कहती है?
यदि अवैध गतिविधियां हुईं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
क्या जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाएगा?
सेटेलाइट सर्वे से खुल सकती है सच्चाई
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2021 से वर्तमान तक की सेटेलाइट इमेज और जीआईएस डेटा की स्वतंत्र जांच कराई जाए तो वन क्षेत्र में हुए बदलाव, कटान, अतिक्रमण और उत्खनन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि वन संपदा को कितना नुकसान पहुंचा और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
अब देखने वाली बात होगी कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शासन स्तर पर बैठे जिम्मेदार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि निष्पक्ष और तकनीकी जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनका सीधा संबंध वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से है।
प्रश्न सिर्फ जंगलों का नहीं, बल्कि वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण की जवाबदेही का है।

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