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शिवपुरी में ‘कुत्ता आतंक’! 60 लोग अस्पताल पहुंचे, मासूम का चेहरा नोचा — आखिर नगर पालिका किसका इंतजार कर रही है?

  Indiaaajtak.in Editor-in-Chief: Vinod Vikat Mob.: 09977708976 दिनांक: 30/05/2026 शिवपुरी में ‘कुत्ता आतंक’! 60 लोग अस्पताल पहुंचे, मासूम क...

 Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief: Vinod Vikat

Mob.: 09977708976

दिनांक: 30/05/2026

शिवपुरी में ‘कुत्ता आतंक’! 60 लोग अस्पताल पहुंचे, मासूम का चेहरा नोचा — आखिर नगर पालिका किसका इंतजार कर रही है?

एक दिन में 60 शिकार, प्रशासन बेखबर; शहर की सड़कों पर जनता या आवारा कुत्तों का राज?



शिवपुरी। शहर में शनिवार का दिन लोगों के लिए भय और दहशत का पर्याय बन गया। एक खूंखार आवारा कुत्ते ने सुबह से शाम तक शहर के अलग-अलग इलाकों में आतंक मचाते हुए बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित करीब 60 लोगों को काटकर घायल कर दिया। जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की लंबी कतारें लग गईं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारी पूरे घटनाक्रम के दौरान क्या कर रहे थे?

सबसे हृदयविदारक घटना लक्ष्मीबाई कॉलोनी रोड पर हुई, जहां घर के बाहर खेल रही महज ढाई साल की मासूम बच्ची पर कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ते ने बच्ची के चेहरे को अपने जबड़ों में दबोच लिया। मासूम की चीखें सुनकर लोग दौड़े और बड़ी मुश्किल से उसे बचाया। इस दौरान बचाव करने पहुंचे एक व्यक्ति को भी कुत्ते ने काट लिया।

शहर में घूमता रहा ‘हमलावर’, जिम्मेदारों को नहीं मिली खबर?

घटना के बाद भी कुत्ता घंटों शहर में घूमता रहा और लोगों पर हमला करता रहा। विजयपुरम निवासी बलराम सिंह रावत सहित कई अन्य लोग इसका शिकार बने। सवाल उठ रहा है कि जब एक ही कुत्ता लगातार लोगों को काट रहा था, तब नगर पालिका की टीम, पशु पकड़ने वाले दस्ते और जिम्मेदार अधिकारी कहां थे?

क्या नगर पालिका को 60 लोगों के घायल होने का इंतजार था? क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद कार्रवाई की जाती?

आखिर करोड़ों का बजट जाता कहां है?

शहरवासियों का आरोप है कि आवारा कुत्तों की समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से शिकायतें हो रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। नगर पालिका हर साल सफाई, पशु नियंत्रण और जनसुरक्षा के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा करती है, लेकिन सच्चाई यह है कि आज लोग अपने बच्चों को घर के बाहर भेजने से डर रहे हैं।

यह सिर्फ कुत्ते का हमला नहीं, व्यवस्था की विफलता है

एक दिन में 60 लोगों का अस्पताल पहुंचना सामान्य घटना नहीं है। यह प्रशासनिक उदासीनता, नगर पालिका की नाकामी और जनसुरक्षा के प्रति लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। यदि किसी शहर में एक आवारा कुत्ता पूरे दिन लोगों को काटता रहे और जिम्मेदार विभाग उसे पकड़ने में असफल रहे, तो यह केवल पशु आतंक नहीं बल्कि व्यवस्था के चरमराने का संकेत है।

जनता पूछ रही है...

आखिर आवारा कुत्तों को पकड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?

नगर पालिका की पशु नियंत्रण योजना कहां है?

60 लोगों के घायल होने की जवाबदेही कौन लेगा?

मासूम बच्ची के चेहरे पर हुए हमले का जिम्मेदार कौन है?

क्या किसी अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?

शिवपुरी की जनता अब आश्वासन नहीं, जवाब चाहती है। क्योंकि अगला शिकार कौन होगा, यह कोई नहीं जानता।

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