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शिवपुरी प्यासी, जिम्मेदार कौन? 8 वर्षों से जल व्यवस्था संभाल रहे ए.ई. सचिन चौहान पर उठे सवाल, जनता मांग रही जवाब

  Indiaaajtak.in Editor-in-Chief: Vinod Vikat Mob.: 09977708976 दिनांक: 30 मई 2026 शिवपुरी प्यासी, जिम्मेदार कौन? 8 वर्षों से जल व्यवस्था सं...

 Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief: Vinod Vikat

Mob.: 09977708976

दिनांक: 30 मई 2026

शिवपुरी प्यासी, जिम्मेदार कौन? 8 वर्षों से जल व्यवस्था संभाल रहे ए.ई. सचिन चौहान पर उठे सवाल, जनता मांग रही जवाब


शिवपुरी। भीषण जल संकट से जूझ रहे शिवपुरी शहर में अब सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि जवाबदेही की भी मांग उठने लगी है। मड़ीखेड़ा जल आवर्धन योजना पर वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की बड़ी आबादी आज भी पानी के लिए परेशान है। ऐसे में नगर पालिका की जल प्रदाय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे ए.ई. सचिन चौहान की भूमिका को लेकर शहर में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पिछले लगभग 8 वर्षों से नगर पालिका की जल प्रदाय एवं मेंटेनेंस व्यवस्था का जिम्मा सचिन चौहान के पास है। इस दौरान कई कलेक्टर बदले, कई सीएमओ बदले, नगर पालिका के अध्यक्ष बदले और जल परियोजनाओं से जुड़े अन्य अधिकारी भी बदले, लेकिन जल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी की कुर्सी आज भी बरकरार है। दूसरी ओर शहर की जनता पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

शहरवासियों का कहना है कि मड़ीखेड़ा जल आवर्धन योजना और उससे जुड़ी मेंटेनेंस गतिविधियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पाइपलाइन बदली गईं, बोर और पंपों के रखरखाव पर भारी बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन नतीजा यह रहा कि हर गर्मी में शिवपुरी जल संकट की चपेट में आ जाता है। सवाल यह है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च हुए तो फिर जल आपूर्ति व्यवस्था स्थायी रूप से मजबूत क्यों नहीं हो सकी?

वर्तमान संकट के बीच जिला प्रशासन और कलेक्टर द्वारा वैकल्पिक जल व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए शहरवासी प्रशासन का आभार व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन साथ ही यह मांग भी तेज हो रही है कि केवल अस्थायी समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कारणों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिनकी वजह से करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल व्यवस्था बार-बार विफल हो रही है।

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि किसी भी योजना पर लंबे समय तक भारी खर्च होने के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं, तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। वे मांग कर रहे हैं कि पिछले वर्षों में जल प्रदाय व्यवस्था और मेंटेनेंस पर हुए खर्चों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों से रिकवरी और वैधानिक कार्रवाई की जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनता बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है, तब वर्षों से जल व्यवस्था की कमान संभाल रहे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर जवाबदेही तय करेगा, या फिर हर साल की तरह इस बार भी जल संकट बीत जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

शिवपुरी की जनता अब केवल पानी नहीं, बल्कि जवाब भी मांग रही है। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की प्यास कब बुझेगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी — यह सवाल आज पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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