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शिवपुरी का विकास रुका या व्यवस्था हुई बंधक? 9 साल से जमे तकनीकी अधिकारी पर उठे तीखे सवाल

  शिवपुरी का विकास रुका या व्यवस्था हुई बंधक? 9 साल से जमे तकनीकी अधिकारी पर उठे तीखे सवाल करोड़ों की योजनाओं का हिसाब कौन देगा, जनता पूछ रह...

 शिवपुरी का विकास रुका या व्यवस्था हुई बंधक? 9 साल से जमे तकनीकी अधिकारी पर उठे तीखे सवाल

करोड़ों की योजनाओं का हिसाब कौन देगा, जनता पूछ रही—जिम्मेदार कौन?


शिवपुरी। नगर पालिका शिवपुरी की कार्यप्रणाली को लेकर शहर में लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। बदहाल सड़कों, अधूरी नालियों, पेयजल संकट, अव्यवस्थित विकास कार्यों और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी परिणाम न दिखने के बीच अब नगर पालिका के तकनीकी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

सबसे अधिक चर्चा सहायक यंत्री (एई) सचिन चौहान को लेकर हो रही है, जो वर्ष 2017 से लगातार शिवपुरी में पदस्थ हैं। बताया जाता है कि उनकी पहली पदस्थापना भी शिवपुरी में ही हुई थी और नौ वर्ष बाद भी वे यहीं कार्यरत हैं। ऐसे में शहर के नागरिकों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि नगर पालिका में सीएमओ बदले, अध्यक्ष बदले, परिषद बदली, प्रशासनिक अधिकारी बदले, लेकिन तकनीकी विभाग का यह महत्वपूर्ण पद नहीं बदला?

नगर पालिका के इंजीनियरिंग विभाग पर शहर के विकास की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। सड़कों का निर्माण, नालियों की व्यवस्था, पार्कों का विकास, स्ट्रीट लाइट प्रबंधन, निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, गुणवत्ता नियंत्रण और करोड़ों रुपये के टेंडरों की निगरानी इसी विभाग के अधीन होती है। यदि शहर का विकास अपेक्षित गति से नहीं हुआ और योजनाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो तकनीकी जवाबदेही पर चर्चा होना भी स्वाभाविक है।

जनता के सवाल, जिनका जवाब प्रशासन को देना चाहिए

आखिर नौ वर्षों से एक ही नगर पालिका में पदस्थ अधिकारी का स्थानांतरण क्यों नहीं हुआ?

क्या शिवपुरी में कोई दूसरा तकनीकी अधिकारी पदस्थ करने योग्य नहीं था?

करोड़ों रुपये की योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाया?

जिन निर्माण कार्यों पर लगातार सवाल उठे, उनकी तकनीकी जिम्मेदारी किसकी थी?

क्या विभाग ने कभी विकास कार्यों की गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया?

यदि सब कुछ सही था तो शहर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर जनता लगातार परेशान क्यों है?

नगर पालिका में कई अधिकारी आए और चले गए, लेकिन तकनीकी विभाग में बदलाव क्यों नहीं हुआ?

क्या लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित नहीं होती?

शहर में यह भी चर्चा है कि विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नागरिक आज भी सड़क, नाली, जल निकासी और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर जवाबदेही तय कब होगी और विकास कार्यों की सफलता-असफलता का आकलन किस आधार पर किया जाएगा।

नगर पालिका का तकनीकी विभाग किसी भी शहर के विकास की रीढ़ माना जाता है। यदि रीढ़ मजबूत हो तो योजनाएं धरातल पर दिखाई देती हैं, लेकिन यदि वर्षों तक खर्च के बाद भी जनता को राहत नहीं मिलती तो सवाल केवल योजनाओं पर नहीं, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली पर खड़े होते हैं।

अब समय आ गया है कि नगर पालिका शिवपुरी के विकास कार्यों, तकनीकी स्वीकृतियों, निर्माण गुणवत्ता और लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय समीक्षा हो। क्योंकि जनता का पैसा खर्च हुआ है, इसलिए जनता जवाब भी मांग रही है।

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